Book Title: Navpada Prakaran
Author(s): Devguptasuri
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund

View full book text
Previous | Next

Page 109
________________ श्री नवपद मकवृत्ती 1186 11 Jain Education In काणं समणे भगवं महावीरे पुवाणुपुति चरमाणे गामाणुगामं दृइज्जमाणे मुहंसुहेण विहरमाणे जेणेव सावत्थी नयरी जेणेत्र कोए चेइए तेणेव उवागच्छइ उवागच्छित्ता अहारूवं उग्गहं जाव विहरइ, तरणं ते समणोवासया इमीसे कहाए लड्डा समाणा जेणेव सयाई गेहाई तेणेव उवागच्छंति व्हाया कयवलिकम्मा पुरिसवग्गुरावंदपरिखित्ता धवलेणं छत्तेणं धरिज्जमाणेणं सावत्थीनयरी मज्झमज्झेणं जेणेव कोटुए चेइए जेणेव समणे भयवं महावीरे जाव पंचविहेणं अभिगमेणं अभिगच्छेति, तिविहाए पज्जुवासणाए पज्जुवासंति, धम्मका भाणियव्वा जह जीवा बुज्झति मुच्चंतीत्यादि, ते समणोवासया धम्मं सोचा निसम्म हट्टतुट्ठा समणं भयवं महावीरं वंदित्ता जामेव दिसिं पाऊभूया तामेव दिसिं पडिगया। तएणं संखे समणोनासए सेसए एवं वयासी ना खलु कप्पर अज्ज अम्हं पोसहसालाए पक्खि पोस पडिजागरमाणाणं विहरित्तए ] कप्पइ अज्ज अम्ह विपुलं असणं पाणं खाइमं साइमं ववडावेत्ता तं पुण असणपाणखाइमसाइमं आसाएमाणाणं विहरित्तए, तक्खणं पोक्खली समणोवासए संखं समणोवासयं एवं वयासी -अच्छह णं तुब्भे सुनिव्युयवीसत्था अहष्णं विउलं असणपाणखाइमसाइमं उवक्खडावेमि, एवं भणित्ता अप्पणप्पणाई गिहाई संवहिया, तरणं संखस्स समणोवास यस्स एयारूवे अन्भत्थिए समुप्पज्जित्था - नो खलु अज्ज अम्ह कप्पइ विउलं असणपाणखाइमसाइमं आसाएमाणाणं विहरित्तए, कप्पड़ मे पोसहसाला ए एगाणियस्स अवीयस्स उम्मुकमणिसुवण्णस्स विहरित्तए, एवं संपेहेइ २ | जेणेव सए गेहे तेणेव उवागए, उप्पलं समणोवासियं आउच्छित्ता जेणेव पोसहसाला जावपोसहसालं अणुपविसइ पोस है करेइ, एगे अबीए विहरइ । इओ य पोक्खलिपभिई समणोवासया मिलिया, नेव संखे समणोवासए आगए, तए णं पोक्खली समणोवासए एवं वयासी -अच्छहणं तुब्भे बीसत्था अहण्णं सदावेमि, तए णं पोक्खली जेणेव संखस्स गिर्ह तेणेव अणुपविट्ठे, तप णं सा उप्पला For Private & Personal Use Only पौषधगुणे शंखानन्दौ ॥ ४८ ॥ w.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138