Book Title: Mulpayadisatta
Author(s): Virshekharvijay
Publisher: Bharatiya Prachyatattva Prakashan Samiti

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Page 69
________________ ४६ ] मुनिश्रीवीरशेखरविजयरचित [ होरसौभाग्यभाष्यम् 'सुक्काए तहुवसमे, संखा उत्रवज्जमाणमिज्जंता। ओहे तह जहजोग्गं, सप्पाउग्गगुणठाणणेस ॥२४६।। (ही.) कालं तु वट्टमाणं, पडुच्च खेत्ते परूवणा णेया । आसिज्ज अईअद्धं, परूवणा उण फरिसणाए ।।२४७॥ (ही.) केवलिआणं खेत्तं, असंखभागो हवेज्ज लोगस्स । लोगस्स असंखेज्जा, भागा वा सव्वलोगो वा ॥२४८ । (ही) ओहस्स तिविहमवि तह, तिरियेगक्खपणकायपणगाणं । सव्वमुहमकायउरल-दुगकम्मणपुंसचउकमायाणं ॥२४६।।(गी) दुअणाणाजयअणयण-अमुहतिलेसभविअभविमिच्छाणं । (गी.) अमणाहारियराणं, सठाणमासिज्ज खित्तमखिलजगं ॥२५०॥ ऊणजगमिगक्खपवण-तिगाण-सेमाण जगअसंखसो (गी.) उववायसमुग्वाया, पडुच्च खिचं तहेव जाणऽस्थि ॥२५॥ णवरि दुविहमखिलजगं, एगक्खणिगोअवायरतिगाणं । घायरपुहवाइचउग-पत्तेआण तयपज्जाणं ॥२५२॥ (ही भा.) तिणरदुपंचिंदियतस-अवेअअकसायकेवलदुगाणं । संजमअहखायाणं, सुक्काए सम्मखइअसण्णीणं।।२५३।। (गी.) केवलिखित्तपमाणं, अस्थि समुग्घायखित्तमासिज्ज । मरणसमुग्घायं पुण, पंचदसण्हऽत्थि जगअसंख सो ॥२५४॥ ओहस्सऽत्थि सठाणुव-वाअसमुग्घायखेत्तओ फुसणा। तिविहा वि सव्वलोगो, गमणागमणेण अड भागा॥२५॥

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