Book Title: Jain Vidya 02
Author(s): Pravinchandra Jain & Others
Publisher: Jain Vidya Samsthan

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Page 129
________________ जैनविद्या 123 लिये . . .. । 30. (क) ध्यानु अगनि तनु जालिये 31. (क) कर्म पटल ख्यो लेंडे (ख) कम्मपटल खउ लेहु 32. (क) सथु पढंतउ मूढ जौ, पालौ जौ व्यौहार (ख) सत्यु पढंत्तउ मूढ म जइ, पालई जण विवहारु 33. (क) काइ (ख) काई 34. (क) पूजिए (ख) पूजियई 35. (क) मोष 36. (क) पौ तौ 37. (क) सील 38. (क) सहै महावय (ख) सहय महव्वय 39. (क) न 40. (ख) जाणई परमकुल 41. (क) भमिसी (ख) भमीयइ 42. (क) (ख) केई 43. (क) लुचावहि 44. (क) (ख) केइ 45. (क) अपा जे मन भावहि, किम पाव्हि भवपारु (ख) आप्पविंदण जाणहि किम यावहि भचयारु 46. (क) तीनि काल बाहिरि वस (ख) तिणि कालु वाहिर बसहिं 47. (क) सहै परीसह भारु . . 48. (क) दरसन न्यानह वाहिरै 49. (क) मारिस ए जम कालु (ख) मरिसै ए जमु कालु 50. (क) पाख मास (ख) पाखि मासि 51. (क) कर 52. (क) पाणी (ख) परिणउ 53. (क) अपा झायनि (ख) अप्पा भयाइ ण 54. (क) तिन होइ (ख) त्तिह णइ 55. (क) ल्यंग 56. (क) मुनि 57. (क) तुसइ (ख) तूस 58. (क) णिवंतु 59. (क) आपा एकु न झावहि, स्यौपुरि जाइ तुरंत (ख) अप्पा इक्क ण झ्यावहिं, सिंवपुरि जाइ णिभंतु 60. (क) जिनवर पूजहि गुरु थुवहि, सथैहि झूनुं कराहि । अपा देउ न झावहि, ते नर जमपुरि जाहि ।। (ख) जिणवरु पुज्जउ गुरु थुणहिं, सत्थई माणु कराई। अप्पा देव रण चितवहि, ते पर जमपुरि जाई ।।

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