Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras Author(s): Publisher: ZZZ Unknown View full book textPage 6
________________ भक्तामर यंत्र -६ Bhaktamara Yantra - 6 Iro अल्पश्रुतं श्रुतवतां परिहासधाम हौं हौं हौं हौं हौं हौं हौं " ही अर्ह णमो कुटूबुद्धीण।" पोयोपोरोप्रोपॉप : तच्चारुचूतकलिकानिकरैकहेतुः ॥६॥ हौ हौ हौं हौ हौ हौं विद्याप्रसादं कुरु कुरु खाहा।" । गौमौनीग्रामोद्योगों "न ह्रीं श्रीँ श्रीं श्रृं श्रः हैं सें यः यः हौं हौ हौं हौं हौं हौं त्वद्भक्तिरेव मुखरीकुरुते बलान्माम् ।। Uplth Dyette 22 emejhh lahday Male 2 ऋद्धि-ॐ हीं अहं णमो कुद्रवुद्धीणं । मंत्र-हीथा श्रीश्र में यः यः ठः ठः सरबति भगवति विद्याप्रसादं कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव अनेक विद्याएं सहज ही आ जाती है याणी के दोष दूर होते हैं। Mastering of Arts & Speech अल्पश्रुतं श्रुतवतां परिहासधाम त्वद्भक्तिरेव मुखरीकुरुते बलान्माम् । यत्कोकिलः किल मधौ मधुरं विरौति तच्चारुचूत - कलिकानिकरैकहेतु ॥ ६॥Page Navigation
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