Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 9
________________ भक्तामर यंत्र -९ Bhaktamara Yantra-9 आस्तां तव स्तवनमस्तसमस्तदोषं नमा नी नौ नौ वीना नानौ णमो अरि म: स्वाहा नीनी नौन नौ नौ नौ भगवते पद्माकरेषु जलजानि विकासभाजि ॥१॥ नीनी नौना वाजामासभा नौ नौ नौ त्वत्सङ्कथाऽपि जगतां दुरितानि हन्ति । नमः Aनी नानी जययक्षात RVEDARA ऋद्धि-ॐ ही अहं णमो अरिहंताणं णमो संभिण्णसोवाणं हा ही हूं फट् स्वाहा । मंत्र-होश्रीका की तरह नमः स्वाहा । प्रभाव-चोरों का भय दूर होता है। Freedom from fear of theives. आस्तां तव स्तवनमस्तसमस्त - दोष त्वत्संकथाऽपि जगतां दुरितानि हन्ति । दूरे सहस्त्रकिरणः कुरुते प्रभैव पद्माकरेषु जलजानि विकाशभांजि ॥९॥ 9

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