Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 25
________________ भक्तामर यंत्र - २५ Bhaktamara Yantra-25 बुद्धस्त्वमेव विवुधार्चित बुद्धिबोधात् न ही अहं णमो उग्गतवाण। ON व्यक्तं त्वमेव भगवन्! पुरुषोत्तमोऽसि ॥२५॥ सर्व सौभाग्यं सर्वसौख्यं च कुरु कुरु स्वाहा। न हाँ ही हूँ ह्रीं ह्रः असिआउसा झौं झौ स्वाहा। त्वं शङ्करोऽसि भुवनत्रय शङ्करत्वात् ।। ION Pave Rollah kabel bel lblik, lief Bella Bellulalaltia LASIPIO का ऋद्धि-ॐ हीं अहं णमो उगतवाणं । मंत्र ॐ हाँ हो रही हः असि आ उ सा झाँप्रा स्वाहा। ॐ नमो भगवति जचे विजये अपराजिते सर्वसौभाग्य सर्वसाख्यं च कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव दृष्टि दोष दूर होता है, साधक पर अग्नि का असर नहीं होता । Removing effects of evil eye and getting freedom from fear of fire. बुध्दस्त्वमेव विबुधार्चित बुध्दि बोधात, त्वं शंकरोऽसि भुवनत्रय शंकरत्वात् । धाताऽसि धीर ! शिवमार्ग-विधेर्विधानात्, व्यक्तं त्वमेव भगवन्! पुरुषोत्तमोऽसि ॥ २५ ॥ 25

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