Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 34
________________ परिशिष्ट - ३ दीप्त्या जयत्यपि निशामपि सोमसौम्याम् नमो नमः स्वाहा। शुम्भत्प्रभावलयभूरिविभा विभोस्ते “ॐ नमो ह्रीँ अर्हं णमो खेलोसहिपत्ताणं।" फं फ फं फं 骂 प न $ क मः च 쇠 道 외 Appendices-3 क ॐ नमो ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं ह्सौं । लोकत्रये द्युतिमतां द्युतिमाक्षिपन्ती । क्रैं ऋद्धि-ॐ ह्रीं अहं णमो खेलोसहिपत्ताणं । मंत्र ॐ नमो हीं श्रीं क्लीं ऐं ह्सी पद्मावचे देव्यै नमो नमः स्वाहा । प्रभाव - गर्भ की संरक्षा होती है। Protecting the embryo. शुम्भत्प्रभावलय - भूरिविभा विभोस्ते, लोकत्रये द्युतिमतां द्युतिमाक्षिपन्ती । प्रोद्यद्-दिवाकर - निरन्तर भूरिसंख्या दीप्त्या जयत्यपि निशामपि सोम-सौम्याम् ॥ ३ 34

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