Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 35
________________ परिशिष्ट - ४ Appendices - 4 . स्वर्गापवर्गगममार्गविमार्गणेष्ट: न ही अर्ह णमो जल्लोसहि पत्ताणं।" नमान 2899999900 नमः स्व भाषास्वभावपरिणामगुणैः प्रयोज्य ः। भव भब वषट् सुधायै स्वाहा। गजगमन ने नमो जये विजये अपराजिते महालक्ष्मि सद्धर्मतत्त्वकथनैकपटुस्त्रिलोक्याः। क्ष रक्ष Louwchle 22 ke landke lablets lanche e lehtellekea -p ऋद्धि-ॐही अहं णमो जल्लोसहि पत्ताणं । मंत्र-ॐ नमो जये विजये अपराजिते महालक्ष्मि अमृतवर्षिणि अमृतं भव भव वषट् सुधायै स्वाहा । प्रभाव-चोरी, मारी, अकाल राजभव आदि नष्ट हो जाता है। Eradicating fear of State, pestilence and thefts. स्वर्गापवर्गगममार्ग - विमार्गणेष्टः, सद्धर्मतत्वकथनैक - पटुस्त्रिलोक्याः । दिव्यध्वनिर्भवति ते विशदार्थसत्व भाषास्वभाव - परिणामगुणैः प्रयोज्यः ॥ ३५ । 35

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