Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 40
________________ भक्तामर यंत्र -३६ Bhaktamara Yantra-36 DIL कल्पान्तकालपवनोद्धतवहिलकल्पं "ने ही अहँ णमो कायबलीणं।" सौ सौ सौ सौ त्वन्नामकीर्तनजलं शमयत्यशेषम् ॥२५॥ कुरु कुरु स्वाहा सौ * सौर "नेही श्री क्लीं ह्रां ह्रीं दावानलं ज्वलितमुज्जवलमुत्फुलिङ्गम्। 19000000 Dit lihtlede philafout by furbo bokeb ऋद्धि-ॐही अर्ह णमो कायवलीणं । मंत्र-ॐ हीं थीं की हॉ ही अग्निमुपशमनं शान्तिं कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव-अग्नि का संकट/भव दूर होता है। Removing fear and danger of fire. कल्पांतकाल - पवनोद्धत - वह्निकल्पंः दावानलं ज्वलितमुज्जवलमुत्स्फुलिंगम् । विश्वं जिघत्सुमिव सम्मुखमापतन्तंः त्वन्नामकीर्तनजलं शमयत्यशेषम् ॥ ४० ॥ 40

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