Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 22
________________ भक्तामर यंत्र - २२ Bhaktamara Yantra-22 स्त्रीणांशतानि शतशो जनयन्ति पुत्रान् " ही अहँ णमो आगासगामिणं।" प्राच्येव दिग् जनयति स्फुरदंशुजालम् ॥२२॥ अवधारणं कुरु कुरु स्वाहा। हो होम्रो धौ 644JABP) “र्ने नमः श्री वीरेहिं जृम्भय जृम्भय नान्या सुतं त्वदुपमं जननी प्रसूता। GAHRAIN It A is bell belli pikk UGE ऋद्धि-ॐही अर्ह णमो आगासगामिणं । मंत्र-ॐ नमः श्री बीरेहिं भय भय मोहय मोहय स्तम्भय स्तम्भय अवधारणं कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव-डाकिनी, शाकिनी, भूत, पिशाच, चुडैल आदि भाग जाते हैं। Getting freedom from witchcraft and black-magic. स्त्रीणां शतानि शतशो जनयन्ति पुत्रान् नान्या सुतं त्वदुपमं जननी प्रसूता। सर्वा दिशो दधति भानि सहस्त्ररश्मि प्राच्येव दिग् जनयति स्फुरदंशुजालं ॥ २२ ॥ 22

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