Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 17
________________ भक्तामर यंत्र - १७ Bhaktamara Yantra-17 ____ नास्तं कदाचिदुपयासि न राहुगम्यः ज ही अहँ णमो अटुंगमहानिमित्तकुसलाणं।' ने न मो प्र सूर्यातिशायिमहिमाऽसि मुनीन्द्रः लोके ॥१७॥ सर्वपीडा सर्वरोगनिवारणं कुरु कुरु स्वाहा। णमो णमिऊण अट्टे मट्टे क्षुदबिघट्टे स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्जगन्ति। hech bhikesh shree pela n japalisaili E ऋद्धि-ॐही अहं णमो अटुंगमहानिमित्त कुसलाणं । मंत्र-ॐ णमो णमिऊण अटे मट्टे क्षुद्रविध क्षुद्रपीडा जटरपीड भंजय भंजय सर्वपीडा सर्वरोगनिवारणं कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव-पेट के सारे रोग दूर होते हैं। Curing of stomach ailments. नास्तं कादाचिदुपयासि न राहुगम्यः स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्जगन्ति । नाम्भोधरोदर - निरुद्धमहाप्रभावः सूर्यातिशायिमहिमासि मुनीन्द्र! लोके ॥१७ 17

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