Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 15
________________ भक्तामर यंत्र -१५ Bhaktamara Yantra-15 चित्रं किमत्र यदि ते त्रिदशाङ्गनाभि नमोस अह णमोट नमः। किं मन्दरादिशिखरं चलितं कदाचित? ॥१५॥ मानसीमहामान त दसपुयाणा अचिन्त्य प्रबलपराक्रल तराज श्रृंखला नीतं मनागपि मनो न विकारमार्गम्। नक्षा तमगादती राकमाय PEnter hindip BIbA ऋद्धि-ॐ हीं अर्ह णमो दसपुब्बीणं । मंत्र-ॐ नमो भगवती गुणवती मुसीमा पृथ्वी बहला मानसी महामानसी स्वाहा । प्रभाव-प्रतिष्ठा और सौभाग्य में वृद्धि होती है। निर्मल ब्रह्मचर्य पालन की शक्ति मिलती है। Strengthening chastity and increasing prestige and prosperity. चित्रं किमत्र यदि ते त्रिदशांगनाभिर्नीतं मनागपि मनो न विकार - मार्गम् । कल्पान्तकालमरुत्ता चलिताचलेन किं मन्दराद्रिशिखिरं चलितं कदाचित् ॥ १५ ॥ 15

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