Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 13
________________ भक्तामर यंत्र - १३ Bhaktamara Yantra-13 वक्त्रं क्व ते सुरनरोरगनेत्रहारि भाभी मः ही आईपी हरया यद्र वासरे भवति पाण्डुपलाशकल्पम् ॥१५॥ मा उजुमा स्वजनवश्य TETTE निःशेषनिर्जितजगत्रितयोपमानम्। REEM22 ऋद्धि-ॐही अहं णमो उजुमईणं । मंत्र-ॐ ह्रीं श्रीं है सः हॉ ए हो ही द्रो द्रौं नः मोहिनि सर्वजनचश्यं कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव-चोर चोरी नहीं कर पाते. मार्ग में कोई भय नही रहता. लक्ष्मी प्राप्त होती है। Acquiring wealth, preventing theft and avpiding fear on journeys. वक्त्रं क्व ते सुरनरोरगनेत्रहारि निःशेष - निर्जित-जगत् त्रितयोपमानम् । बिम्ब कलङ्क-मलिनं क्व निशाकरस्य यद्वासरे भवति पांडुपलाशकल्पम् ॥१३ ॥ 13

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