Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 12
________________ भक्तामर यंत्र - १२ Bhaktamara Yantra-12 यैः शान्तरागरुचिभिः परमाणुभिस्त्वं नमो भगवते ठे नमो अनुदिनं मनुज स्वयात्रासुभिताय नही अर्ह णमो बोहिबुद्धीणों यत् ते समानमपरं नहि रूपमस्ति ॥१॥ ह्रीं ह्रीं ह्रीं नमः ज्वालयु सुझस्तान् बोधितादान बुधौदान कुरु कुरु स्वाहा।" ने आं आं अं अः सर्वराजा जामी श्रुतजलानिरयै परै प्रसिद्धि कैश्चित् अतुलबलपराक्रमाय निर्मापितस्त्रिभुवनैकललामभूत! Paelete Units Page 22-UPajab 122 bloklah bile halk :blaase Da bi blue ऋद्धि-ॐ ह्रीं अई णमो योहिबुद्धीणं । मंत्र के औं ऑ अं अः सर्वराजाप्रजामोहिनि सर्वजनवश्यं कुरु कुरु स्वाहा । प्रभाव-हाथी का मद उत्तर जाता है, अभीप्सित व्यक्ति मिल जाता है। Becalming rogue elephants and meeting the desired person. यैः शान्तरागरुचिभिः परमाणुभिस्तवं निर्मापितस्त्रिभुवनैक ललाम-भूत। तावन्त एव खलु तेऽप्यणवः पृथिव्यां यत्ते समानमपरं न हि रूपमस्ति ॥ १२ ॥ 12

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