Book Title: Bhaktamara Stotra Yantras
Author(s): 
Publisher: ZZZ Unknown

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Page 10
________________ भक्तामर यंत्र १० नात्यद्भुतं भुवनभूषणभूतनाथ ! 奇 नमः । हो हो हो हो हो भूत्याश्रितं य इह नात्मसमं करोति ? 1991 उपसर्ग 12113 हो हो हो ही 1) पराज हकृताची भयपूर्ण स्वाहा (क) हीँ न ग णामी सर्ययुधात हीँ हीं हो Bhaktamara Yantra - 10 ही एक ●हीँ हाँ हाँ हाँ णमो शत्रुविनाशनाय भूतैर्गुणैर्भुवि भवन्तमभिष्टुवन्तः। क्रैं ऋद्धि-ॐ ह्रीं अर्ह णमो सर्वबुध्धीणं । मंत्र ॐ हो हीं हूँ श्री श्री श्रं वः सिद्धबुद्धकृतार्थो भव भव वषट् संपूर्ण स्वाहा । प्रभाव- कुत्ते ने काटा हो तो निर्विष हो जाता है। Curing dog-bite. नात्यद्-भूतं भुवन- भुषण भूतनाथ भूतैरगुणैर्भुवि भवन्तमभिष्टुवन्तः तुल्या भवन्ति भवतो ननु तेन किं वा भूत्याश्रितं य इह नात्मसमं करोति ॥ १० ॥

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