Book Title: Agam 41B Ohnijjutti Mulsutt 02B Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 15
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ||५५165 (७४) ||५९1458 (७६) पिनियुति - (७०) (७०) तिनि उ पएससमया ठाणदिइउ दविएतयाएसा घउपंचमपिंडाणंजयजया तप्पलवणपा मुत्तदविएसुजुअइजइ अनोत्राणुवेहओ पिंडो मुत्तिविमुत्तेसुविसोजुअइनणुसंखबाहुल्ला ||५६/156 जह तिपएसोखंघोतिसुविपएसेसुजोस सोज मोगाढो अविमागिण संबद्धो कहनु नेवंतदाधारो ||५७1-57 अहवा चउण्ह नियमाजोगविभागेण जुञ्जए पिंडो दोसु जहियं तु पिण्डो वणिजइ कीरए यावि ||५८1458 दुविहो उ भावपिण्डो पसत्यओ चेव अप्पसत्योय एएसिंदोहंपिय पत्तेय परूवणं चोच्छं (७५) ___ एगविहाइदसविहो पसत्यओ वेव अप्पसत्योय संजम विखाचरणे नाणादितिगंध तिविहो उ ॥६०-60 नाणं दंसण तव संजमो य यय पंच छच्च जाणेशा पिंडेसणं पाणेसण उग्गहपडिमा य पिंडम्मि ६३||-81 पययणमाया नवमगुत्तिओ तह यसमणथमो य एस पसत्यो पिंडो भणिओ कम्मट्ठमहणेहि ||६||-62 (७८) अपसत्योय असंजम अत्राणं अविरइय मिच्छतं कोहायासबकाया कमेऽगुत्तीअहम्मोय बज्झाइयजेण कम्मंसो सब्यो होइ अप्पसत्यो उ मुच्चइ यजेण सो उण पसत्यओ नवरि वित्रेओ दसणनाणचरित्ताण पनवाजे उजत्तिया वावि सोसो होइ तयखो पञ्जवपेयालणा पिंडो 11६41-65 (८) कप्पाणजेण मावेण अप्पगंचिणइ चिकणं पिंड सो होइ भावपिंडोपिंडयए पिंडण ओ जम्हा ॥६168 दव्वे अधित्तेणं भावंमिवेयपसत्यएणिहंपगयं उचारियत्यसरिसा सीसमइ सेसा उयिकोवणवाए ॥६७1-87 (३) आहारउयहिसेआपसत्यपिंडस्सुदरगाहं कुणइ आहारे अहिगारो अहिं ठाणेहि सो सुद्धो ।।६८08 निव्वाणं खलु कजं नाणाइतिगंचकारणं तस्स निव्याणकारणाणंघ कारण होइ आहारो ॥६९-80 जह कारणं तु तंतू पडस्स तेसिंघहोति पम्हाई नाणाइतिगरसेवं आहारोमोक्खनेमस्स ॥७०||-70 जह कारणमणुवहयं कझं साहेइ अविकलं नियमा मोक्खक्खमाणि एवं नाणाईणि उ अविगलाई ७91-71 (८७) संखेवपिडियत्यो एवं पिंडो मए समक्खाओ फुडवियडपायइत्यं योच्छामि एसणं एत्तो १३|-83 11६४||-84 ७२172 For Private And Personal Use Only

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