Book Title: Agam 41B Ohnijjutti Mulsutt 02B Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 19
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra ७६ www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir (१४२) जेऽविय परिवेसंती भायणाणि धरंति य तेऽवि बज्झति तिब्वेणकम्मुणा किमु भोइणो (१४३) सामत्यण रावसुए पिइवहण सहाय तह म तुण्डिक्को तिहपि हु पडिसुणणा रण्णा सिमि सा नत्वि (१४४) भुंज न भुंजे भुंजसु तइओ तुसिणीउ भुंजए पढमो तिव्हपि हु एडिसुणणा पडिसेहंतस्स सा नत्थि ( १४५ ) आणेत्तुर्भुजगा कष्णा उ बीयरस बाइओ दोसो तइयस्स य माणसिओ तीहिं विसुद्धो घउत्थो उ ( १४६ ) पडि सेवण पडिसुणणा संवासऽणुमोयणा उ चउरो वि पियमारगरायसुए विभासियव्वा जइजणेऽवि (१४७) पल्लीबहंमि नट्ठा चोरा वणिया चयं न चोरति न पलाण पावकर वरय त्ति काउंरत्रा उवालद्धा (१४८) आहाकडभोईहिं सहवासो तह य तव्विवपि दंसणगंधपरिकहा भाविंति सुलूहवित्तिंपि ( १४९) रायोरोहऽ वराहे विभूसिओ घाइओ नयरमज्झे धत्राधत्रत्ति कहा बहावहो कप्पडियखोला (१५०) साउं पजत्तं आयरेण काले रिउक्खमं निद्धं तागुणविकत्यणाए अभुंजमाणेऽवि अनुमत्रा (१५१) आहा अहे य कम्मे आयाहम्मे य अतकप्पे य जह वंजणनाणत्तं अत्थेऽवि पुच्छाए एवं (१५२) एगट्ठा एगवंजण एगट्ठा नाणवंजणा चैव नाण एवंजण नाणट्ठा वंजणानाणा (१५३) दिवं खीरं खीरं एगई एगवंजणं लोए एग बहुनामं दुद्ध पओ पीलु खीरं च (१५४ ) गोमहिसि अयाखीरं नाणङ्कं एगवंजणं नेयं लोए घडपडसगडरहाई होइ पिहत्थं पिहनाम (१५५) आशाकम्माईणं होई दुरुत्ताई पढममंगो उ आहाहेकम्मतिय बिइओ सक्किद इय मंगो (१५६ ) आहाकम्तरिया असणाई उ चउरो तइयमंगो आहाकम्प पडुच्चा नियमा सुत्रो घरिममंगो (१५७ ) इंदत्यं जह सद्दा पुरंदराई उ नाइवत्तंते अहकम्प आयहम्मा तह आहं नाइवत्तंते (१५८) आहाकम्मेण अहे करेति जं हगद्द पाणभूयाई जंतं आइयमाणो परकम्पं अतणो कुणइ (१५९) कस्सति पुच्छियंमी नियमा साहम्पियस्स तं होइ साहम्मियस्स तम्हा कायव्वपरूवणा विहिणा For Private And Personal Use Only Kafegit - (983) ॥१२०॥-120 193911-121 ॥१२२॥1-122 ॥१२३॥-123 ||१२४|१-124 1192411-126 ।।१२६||-126 |११२७|| 127 ||१२८|| 128 ॥१२९||-129 1193011-130 ||939||-131 ॥१३२॥-132 ||933||-139 ||१३४||-134 1193411-135 ॥१३६॥-136 ॥१३७॥-137

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