Book Title: Agam 41B Ohnijjutti Mulsutt 02B Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 37
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra * www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir (४६६) दूइतं खु गरहियं अप्पाहिलं बिइयपचया भणति अविकोविया सुया तेजा आह मई मणसु खर्ति (४६७) उभयेऽविय पच्छत्रा खंत कहिजाहि खंतियाए तुमं तं तह संजायंतिय तहेव अह तं करेासि हि (४६८) गामाण दोह वेरं सेज्जायरि धूय तत्य खंतस्स गमो वहपरिणय खंतऽज्झत्थ पाह णं व नाए कए जुद्धं (४६९ ) जामाइपुत्तपइमारणं च केण कहियंति जणवाओ जामाइपुत्तपइमारएण खंतेण मे सिद्ध ( ४७० ) नियमा तिकालविसएऽवि निमित्ते छच्चिहे भवे दोसा स तु वट्टमाणे आउमए तत्थिमं नायं (४७१) लाभालाभं सुहं दुक्खं जीविपं मरणं तहा छव्यिहेऽवि निमित्ते उ दोसा होंति इमे सुण (४७२) आकॅपिया निमित्तेण भोइणी भोइए चिरगयंमि पुव्वभणिए कहं ते आगउ रुट्टो य वडवाए (१३३) दूरामोयण एगागि आगओ परिणयस्स पचोणी पुच्छासमणे कहणं साइयंकार सुमिणाई (३७४) कोवो वडवागव्यं च पुच्छिओ पंचपुंडमाहंसु फालण दिले जइ नेव तो तुहं अवितहं कइ वा (४७५) जाई कुल गण कम्मे सिप्पे आजीवणा उ पंचविहा सूयाऍ असूयाऍ व अप्पाण कहेहि एक्केक्के (४७६) जाईकुले विभासा गणो उमल्लाइ कम्म किसिमाई तुष्णाइ सिप्पऽणावञ्जगं च कम्पेयराऽऽ वज्रं (४७७) होमायवितहकरणे नज्जइजह सोत्तियस्स पुत्तोति वसिओ वेस गुरुकुले आयरियगुणे व सूएइ (४७८) सम्ममसम्मा किरिया अणेण ऊणाऽहिया व विबरीया समिहामंताहुइठाण जागकाले य घोसाई (४७९) उग्गाइकुलेसुवि एवमेव गणमंडलप्पवेसाई देउलदरिसणभासाउवणयणे दंडमाइया (४८०) कत्तरि पओअणावेक्खवत्थुबहुवित्थरेसु एमेव कम्मेसु य सिप्पेसु य सम्ममसम्मेसु सूईयरा (४८१) समणे महाणि किवणे अतिही साणे य होइ पंचमए वणि जायणत्ति वणिओ पायप्पाणं बणेइत्ति (४८२) मयमाइवच्छगंपिव वणेइ आहारमाइलोभेणं समणे मारणेस य किविणाऽतिहिसाणभत्तेसुं (४८३) निग्गंध सक्क तावस गेरुय आजीव पंचहा समणा तेसि परिवेसणाए लोग्मेण वणिज को अप्पं For Private And Personal Use Only मिनिज्जुति (४६६) - ||४३१|| -431 ||४३२ ॥ -432 ४३३||-433 ||४३४|| -494 ||४३५|| 435 ॥५॥प.-5 ||४३६||-438 ||३३|| पा.-33 ||३४|| मा.-34 ॥४३७॥-437 IM3211-438 ॥४३९॥-439 ||४४० || -440 ||४४१|| --441 ||४४२॥ -442 ||४४३॥-443 ||४४४ ॥ -444 ||४४५ ||-448

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