Book Title: Agam 41B Ohnijjutti Mulsutt 02B Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 22
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ||१७||-174 1१७५11-176 ॥१७६||-178 ॥१७७||-17 ॥१७८||-178 ॥१७९||-179 ११८०11-180 1१८१11-181 थाहा - १९० (१९) बड्दइ हायइछाया नत्यि च्छिक्कं पूइयंपिव नकप्पे नयआहाय सुविहिए निव्वत्तयई रवीच्छायं (१९७) अघणघणचारिंगगणे छाया नठा दिया पुणो होइ कप्पइ निरायवे नाम आयवे तं विवोर्ड (१९८) तम्हान एस दोसो संभवईकम्मलखणविहूणो तंपियछुअइधिणिल्ला यओमाणा अदोसिला (१११) परपक्खो उगिहत्या समणासमणीउ होइ उसपक्खो फासुकडं रद्धं या निद्विपमियां कई सव्वं (२००) तस्स कडनिडियंमी अवस्स कमि निष्ठिएतस्स चउभंगो इत्य भवे घरमदुगे होइ कप्पंतु (२०१). चउरो अइक्कम वइक्कमोय अइयार तह अणायारो निदरिसण घउण्हवि आहाकम्मे निमंतणया (२०२) सालीघयगुलगोरस नवेसु यल्लीफलेसुजाएK दाणे अहिगमसड्ढे आहाय कए निमंतेइ (२०३) आहाकम्मग्गहणे अइकम्माईसुयट्टए चउसु नेउरहारिगहत्यी चउतिगदुगएगचलणेणं (२०४) आहाकम्मामंतण पडिसुणमाणे अइक्कमो होइ पयभेयाउ वइक्कम गहिए तइएयरोगिलिए (२०५) आणाइणोयदोसा गहणे जमणियमह इमे तेउ आणामंगऽणवत्या मिच्छत्तविराहणा वेव (२०६) आणं सव्वजिणाणं गिण्हंतोतं अइक्कमाइ सुखो आणं चऽइक्कमंतो कस्साएसा कुणइ सेसं (२०७) एक्केण कयमकझं करेइ तप्पचया पुणो अत्रो सायाबहुलपरंपर वोच्छेओ संजमतवाणं (२०८) जोजहवायं न कुणई मिच्छट्टिी तओहुको अत्री वड्ढेइ य मिच्छत्तपरस्स संकंजणेमाणो (२०९) वड्डेइ तप्पसंगं गेही य परस्स अप्पणो चेव सजियंपिभिन्नदादोन मुयइ निबंधसो पच्छा (२१०) खद्धे निद्धेय रुया सुत्ते हाणी तिगिच्छणे काया पडियरगाणविहाणी कुणइ किलेसं किलिस्संतो (२११) जह कमंतु अकप्पं तच्छिक्कं वाऽवि भायणठियं वा परिहरणं तस्सेव य गहियमदोसंघतह मणइ (२१२) अब्मोजे गमणाइय पुच्छा दव्वकुलदेस खित्तभावेय एवजयंते छलणा दिद्वता तत्यिमे दोनि (२१३) जह वंतं तु अमोज भतंजइविय सुसक्कयं आसि एवमसंजमवमणे अणेसणिशं अमोअंतु 11१८२11-182 ॥१८३1-18 ॥१८४||-184 ॥१८५0-185 ॥१८६||-188 ॥१८७||-187 119८८10-188 १८९||-189 ॥१९०|-100 १९१11-191 For Private And Personal Use Only

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