Book Title: Agam 41B Ohnijjutti Mulsutt 02B Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 30
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandin गहा-३४० ॥३१२||-312 ॥३१३||-313 ॥३१४1-314 ॥३१५||318 ॥३१६||-316 ॥३१७||-317 ॥३१८॥318 ॥३१९|-918 ॥३२०11-320 (३४०) धम्मकह वाय खमणं निमित्त आयावणे सुयष्वाणं जाईकुल गण कम्मे सिप्पम्मिय मावकीयंतु (३४१) घम्मकहाअक्खित्तेधम्मकहाउडियाण वागिण्हे कड्दं हयं ति साहयो चियतुंय कहि पुच्छिए तुसिणी (३४२) किंवा कहिछारा दगलोयरियापहवडगारत्या किं छगलगगलवलयामुंडकुडुबी व किं कहए (३४३) एमेव वाइखमए निमित्तमायावगम्मि य विमासा सुयठाणं गणिमाई अहवा वाणायरियमाई (३४) पामिश्चंपिय दुविहं लोइय लोगुत्तरंसमासेण लोइय सझिलगाई लोगुत्तर वत्यमाईसु (३४५) सुपअभिगमनाय विही बहि पुच्छाएगजीवइससाते पविसण पागनिवारण उछिदण तेल जइदाणं (३४५) अपरिमियनेहवुड्डी दासत्तं सोय आगओ पुच्छा दासत्तकाणमा रुय अचिरा मोएमि एत्ताहे (३४७) भिक्ख दगसमारंभेकहणाउझे कहिं ति वसहित्ति संवेया आहरणं विसा कहणा कइवयाउ (३४८) एए चेव य दोसा सविसेसयरा उ वस्थपाएसुं लोइयपामि सुं लोगुत्तरिया इमे अन्ने (३४९) मइलिय फालिय खोसिय हियनढे याविअन मागते अविसुंदरेवि दिण्णे दुक्कररोई कलहमाई (३५०) उच्चत्ताए दाणं दुल्लभ खगूड अलस पामिचे तंपिय गुरुस्सगा से ठवेइ सो देइ माकलहो (३५१) परियट्टियपि दुविहं लोइय लोगुत्तरंसमासेणं एक्केक्कंपिय दुविहं तहब्वेअभदव्वे य (३५२) अवरोप्परसझिलगा संजुता दोवि अत्रमन्नेणं पोग्गलिय संजयटा परिपट्टण संखडे बोही (३९३) अनुकंप भगिणिगेहे दरिद्द परियट्टपाय कूरस्स पुच्छा कोदवकूरे मच्छर नाइक्ख पंताये (३५४) इयरोऽविय पंतावे निसि ओसवियाण तेसि दिक्खाय तम्हाउनघेतव्यं कइवाजेओसमेहिति (३५५) ऊणहिय दुखलं वा खरगुरु छिन्त्रं मइल असीयसहं दुव्यत्रं वा नाउँ विपरिणमे अवमणिओ वा (१५६) एगस्स माणजुत्तं न उ बिइए एवमाइकजेसु गुरुपामूले ठवणं सो दलपइ अन्नहा कलहो (३५७) आइनपणानं निसिहामिहडंच नौनिसीहंच निसिहामिहडंठप्पं वोच्छापी नोनिप्तीहंतु ॥३२१॥321 ॥३२॥-922 ॥३२३||323 ॥३२४॥324 ॥३२५||-320 ॥३२६॥-328 ॥३२७||-327 ॥३२८||-328 ॥३३९1-328 For Private And Personal Use Only

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