Book Title: Agam 32 Chulika 02 Anuyogdwar Sutra Anuogdaraim Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 436
________________ परिशिष्ट:१-विशेषनामानुक्रम ३६६ मूल नक्षत्र मोत्तिय धातु और रत्न ३४१२ ३८५,६५५,६५९,६८१ ६८५ ५२२,५२५ मोर प्राणीवर्ग देव २५४ रोहिणी लंख लच्छी लता लव लवण लवण लाउय लासग लिक्खा रक्खस रजत रज्जु रत्त समुद्र धातु और रत्न मान के प्रकार समय के प्रकार नक्षत्र ३४१,३४१११ नर्तक और खिलाड़ी ८८ देव २६४१५ वनस्पति २५० समय के प्रकार २१९,४१७।२ १८५११ खाद्य पात्र ३२३ राजपरिकर मान के प्रकार ३९५११,३९९ ३९२ १०,३१,५४,७८,१०३, ३८५ ३८०।१ ४२२,४२४,४२९,४३१, ४३६,४३८ ६५५,६५९,६८१,६८५ १९,२० २६७ ५२४ लेण लेप्पकम्म हस्तकौशल रत्तरयण रत्तासोग रथ रम्मगवस्स रम्मगवास रम्मगवासय रयणि धातु और रत्न वनस्पति वाहन जनपदग्राम जनपदग्राम नाम मान के प्रकार ५६० लेप्पकार लेहवाह लोगायत लोव लोहकडाह लोही वइसे सिय वंदणय ३८८।१,३९१,४००, ४०३,४:९ ३०४।१,३०५१ ६५५,६५९,६८१,६८५ २५३,३३२,३९२,५२२, रयणी रयय रह ३९२ स्वर धातु और रत्न वाहन ५५२ वक्कय सूत्र रहरेणु रहिय राइण्ण रामायण राय मान के प्रकार नाम कुल लौकिक ग्रन्थ राजपरिकर ३९५।१,३९९ ३३२ ३४३ २५,४९,५४८ १९,२६४।१,३६२,३६५, ३६६,४०८ ३५५ रायकुल रिसभ वग्घ वज्झकार वण वणमयूर वणमहिस वणराइ वणवराह वणसंड वणहत्थि वत्थिय वत्थु शिल्पी संदेशवाहक ३०२७ लौकिक ग्रन्थ ४९,५४८ व्याकरण २६५,२६७ गृह उपकरण गृह उपकरण ३९२ लौकिक ग्रन्थ ४९,५४८ ग्रन्थ ७४ ४०,४५ प्राणीवर्ग ५८५ शिल्पी ३६० वन ३५५,३९२,५३१,५३५ प्राणीवर्ग प्राणीवर्ग ३५५ वनवर्ग ३९२ प्राणीवर्ग ३५५ वनवर्ग ३९२ प्राणीवर्ग ३५५ शिल्पी खुली भूमि ३८०१२ व्यक्ति २२७,२२८ पारिवारिक सदस्य २६९ व्याकरण ३०८ प्राणीवर्ग ३५५,५२५ शिल्पी ३६० नक्षत्रदेव ३४२।२ आभरण ५२५ नाम ३३४ प्राणीवर्ग ३५३,५५२,५२५ स्वर हद्द देव रुद्द २९८।१,२९९।१,३००।१, ३०१०१,३०२।२ २० ३४२११ ३४१२१ ३०९।१,३१३।१,२,३१३ ३४१ ३४१ ३४१ ३४१ रोह नक्षत्रदेव रेवती नक्षत्र रस रोहिणिदास नाम रोहिणिदिण्ण नाम रोहिणिदेव नाम रोहिणिधम्म नाम रोहिणिय नाम रोहिणिरक्खिय नाम रोहिणिसम्म नाम रोहिणिसेण नाम वद्धमाण वधू वयणविभक्ति वराह वरुड ३४१ ३४१ वरुण वलय वसंतय वसह (भ) ३४१ Jain Education Intemational For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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