Book Title: Agam 32 Chulika 02 Anuyogdwar Sutra Anuogdaraim Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 442
________________ टि. अंगुल अंगोपांगसहित अंशुक, भीमांक अण्डज अध्ययन अनन्त अनानुपूर्वी अनुगम अनुयोगद्वार ५९६-६०३ अनादिपारिणामिक सादिपारिणामिक २८८ १५० अनेकद्रव्यस्कन्ध अनौपनिधिको द्रव्यानुपूर्वी और नय अपर्याप्त अधिकार अल्पबहुत्व अल्पबहुत्व नहीं होता अवमान प्रमाण अवयव से होने वाला नाम अव्ययीभाव असंख्यात आख्यातिक आगम आगमतः द्रव्य निक्षेप और नय आगमतः द्रव्यावश्यक आगमतः भाव अक्षीण आत्मगुल यू० ३८९ ४९ ४३ १२१,७१०,७११ ४१ ६१९ - कौटिलीय अर्थशास्त्रोक्त मान -चरकोक्तमान -रोमान Jain Education International ७५ ६९ ११३ २५४ ६२० १७४ १३८ ३८० ३२७ ३५६ ५८७-५९५ २७० २६६ १४ १२ ६४२ ३९० वर्तमान मान वर्तमान मान ३६४ आत्मानुशिष्टकार आनुपूर्वी आनुपूर्वी द्रव्य कौनसे भाव में १७३ आनुपूर्वी द्रव्य लोक के कितने भाग में २०९ १०१ परिशिष्ट : ३ टिप्पण अनुक्रम पृ० २३४ ५७ ५४ ५४ ३७८ ३३२ १८२ १०७ ९९ ३८१ ७१ ५७ ९७ १७६ ३४६ १३२ १०५ २३४ २११ २१४ ३२९ १७७ १७६ २७ २२ ३७८ २३४ २३६ २३६ २३६ २१६ ९६ १३१ १४७ टि० आनुपूर्वी द्रव्य शेष द्रव्यों के कितने भाग में १७२ २१२ १६७ २०८ आनुपूर्वी द्रव्यों का अन्तरकाल आनुपूर्वी द्रव्यों का परिमाण आनुपूर्वी द्रव्यों की कालावधि १७०; २११ अभिप्रायिक नाम ३४७ आमंत्रण में अष्टमी विभक्ति होती है ३०८ ६४४ २८ ७४ आय आवश्यक के एकार्थक नाम आवश्यक के छह अर्थाधिकार आहारक शरीर उत्कीर्तनानुपूर्वी उत्कृष्टतः असंख्येयकाल उत्सेधांगुल की कारण सामग्री उत्सेधांगुल के प्रयोजन उन्मान प्रमाण उपक्रम उपोद्घातनिर्युक्ति अनुगम व २६ द्वार एक द्रव्य की अपेक्षा लोक के असंख्यातवें भाग में होता है एक राशि एक शेष एकाक्षरिक नाम ओरालिय ( औदारिक शरीर ) औपनिधिक द्रव्यानुपूर्वी औपम्य काल औपसर्गिक कनकसप्तति कापिल कालानुपूर्वी कुलनाम कृमिराग कौटिलीय अर्थशास्त्र ཡཱཿ॰ For Private & Personal Use Only ४५९ २२६ १७१ ३९५ ४०१, ४०२ ३७८ ७६-९९ ७१३ १२७ १४० ३५७ २४९ ४५७ १४७ ४१८-४४० २७० ४९ ४९ १९६ ३४३ ४३ ४९ पृ• १३० १४८ १२८; १४७ १२९; १४८ २१३ २०७ ३७९ ३८ ६९ २८३ १४९ १२९ २४० २४१ २३३ ७२ ३८१ १०२ १०६ २१४ १७६ २८२ १०६ २८० १७७ ५६ ५६ १४७ २१२ ५५ ५६ www.jainelibrary.org

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