Book Title: Agam 26 Chhed 03 Vyavahara Sutra Vavaharo Terapanth
Author(s): Tulsi Acharya, Mahapragna Acharya
Publisher: Jain Vishva Bharati

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Page 25
________________ तइयो उद्देसो ६१६ मुसावाई असुई पावजीवी, जावज्जीवाए तेसि तप्पत्तियं तो कप्पइ आयरियतं वा जाव गणावच्छेइयत्तं वा उद्दित्तिए वा धारेतए वा ॥ २८. बहवे आयरिय उवज्झाया बहुस्सुया बब्भागमा बहुसो बहुआगाढागाढेसु कारणेसु माई मुसावाई असुई पावजीवी, जावज्जीवाए तेसिं तप्पत्तियं नो कप्पर आयरियत्तं वा जाव गणात्रच्छेइयत्तं वा उद्दित्तिए वा धारेत्तए वा ॥ २६. बहवे भिक्खुणो बहवे गणावच्छेइया बहवे आयरिय उवज्झाया बहुस्सुया बभागमा बहुसो बहुआ गाढा गाढेसु कारणेसु माई मुसावाई असुई पावजीवी, जावज्जीवाए तेसि पत्तियं नो कप्पड़ आयरियत्तं वा जाव गणावच्छेइयत्तं वा उद्दिसत्तए वा धारेत्तए वा । --त्ति बेमि ॥ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org

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