Book Title: Samdhikavya Samucchaya
Author(s): R M Shah
Publisher: L D Indology Ahmedabad

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Page 132
________________ तव-संधि १०७ [३] अह बार-भेम-तव-तवण-लग्ग छंडेविणु घर-पुर-रमणि-वग अणुकमि अणुमोअसु' साहु-सत्थ तुह होइ जेण' जीहा पप्तत्थ छम्मास भमंतई गामि गामि मोदक मिसि जिणि निम-कम्म पामि रिमें ऊरीकय नाण-सार । समरिज्जइ सो ढंढणकुमार ऊणोअरिआ तव तविअ जेहिं संग्ग-अपवग्ग-सुह लहिम तेहिं गोसालाइसु जे पुण विसेस तं जाणेवउं तव-महिम लेस जो चउ निम-निअमह भंग-भीरु न.. नरय-खयर-तिरि-जम्म-बीरु उज्झिय गय सुरगई धम्म-मूल सो नंदउ नंद उ वंकचूल साहिअ समग्ग भरहेण जेण तणु जाणिय परवस अ मयेण रस-छंडिअ वप्ति-किम-लद्धि-सिद्ध गय सगि सणकुमारो पसिद्ध जिणि तत्त-सिलोवरि निअ-सरीर सुक्का डिम लहु किय तेण धीर पत्तउ उत्तम-सब-सिद्धि सो सालिभद्द आसन्न-सिद्धि सिवि' रहिवं अचल अणंत काल तिणि कूव-पट्टि जो उभिआल सिक्खेइ थिरत्तण चउर मास संभूति-सीस सो दुइ-विणास निम-कम्मकार मण-वयण-काय तसु दोस जणाविम सु गुरु-राय तिन्नि वि छंडिअ जो मुत्त जाय सो जयउ सुज्ज सिव-सुह-सहाय विणएण जेण सि रे-वीर-सामि पामिश्र कामिअ किम वेरि नामि सो पुकसाल' वय-गह-रसाल जयवंत विणइ-जण-कुसुममाल । जिणि वाहिअ वेआवच्चि देह "दासह जिम भाडङ दिद्ध एह सुर-भोग पवर-रमणी-सिणेह सो नंदिसेण होसिइ अदेह विग्गह किम जिणि हठि वरिस बार निय-देह-दुग्ग-ठिअ कम्म-वार अक्सर-बलि कड्ढिम पत्त-नाण सो मास-तुसउ "मुणि-सुहड जाण. दढ झाण जस्स नाणेवि खे वि सुर-नर निअ-सिर धूणति ते वि जाणिम निसेह तिणि सिद्धि-पत्त सु पसन्नचंद-रिसि भव-विरत्त २४ सोवन्न-सेल-सम-पह-थिरस्स उस्सग्ग-राग जसु संठिअस्स. पासे धुब जिम धुव-दीव जाय सो नंदउ चंदवडिंस राय 1. B. अणुमोहसु 2. A. जेम 3. A. चूरी 4. A. सग्गाप० 5. A. जाणेसु 6. A. रिय 7 B. सिब 8. A च्यारि 9. A पुषमाल 10. A दीसहि 11. B. रिसि 12. B. सुंदर २६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org


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