Book Title: Patan Chaitya Paripati
Author(s): Kalyanvijay
Publisher: Hansvijayji Jain Free Library
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श्रीजिनवरने वंदन करतां, होवे अति आणंदो रे ।। भ०२॥ त्रणसे अठोत्तर जिनप्रतिमा, सामलपासनी पासे । श्रीमहावीर पासे ब्यासी जिनवरसुं,वंदो मन उल्लासे रे॥भ०३।। देहरासर तिहां दोय अनोपम, रूप सोवनमय काम । सोवन रूप रयणमे प्रतिमा, दीसे अति अभिराम भ०४॥ अजुवसा पाडामां प्रतिमा, सत्तोतर सुखदाइ । पीतलमे श्रीविमलजिणेसर, वंदो मन लय लाइ रे ॥भ०५॥ दोसीकुंपाना पाडामांही, ऋषभ जिणेसर सोहे । सुखदायक जिन सोल हे सुगुणनर, देखी जन माहे भ०६॥ वसोवाडे दोय शत अठावीस, शांविजिणेसर सामी । ओगणीस जिनमुं' दोसीवाडे,ऋषभ नमुं सिर नामी रे॥७॥ आंबादोसीना पाडामांही, मुनिसुव्रत जिन सोल । पंचहटीए एकसोने वीस,ऋषभजिणंद रंगरोल रे।भ०४ घीयोपाडामां दोय देहरा, शांतिनाथ पार्श्वनाथ । एकसो त्रेवीस तेर प्रतिमा, मुगतिपुरीनो साथ ॥ भ० ९॥ एकसो छन्नु रिषभजिणंदमुं, प्रतिमा कटकीये वंदी। धोलीपरवमां ऋषभ मुनिसुव्रत छेतालीस चिर नंदी रेरोभ०१०
१'नेउ जिन सु' ए पण पाठ छे. २. 'वीस' एवो 'पण पाठ छे.
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