Book Title: Patan Chaitya Paripati
Author(s): Kalyanvijay
Publisher: Hansvijayji Jain Free Library

View full book text
Previous | Next

Page 123
________________ भास शाणापुर सिरि वद्धमाण, निभह भयवारण । मुणिसुव्वय पहु पूजीयइ ए, गइनिज्जियवारण ॥ ७ ॥ नाराद्रइ सिरि वीरनाह, भवतिमिर दिणेसर । ओडापुर मुखभंडणउए, सिरि वीर जिणेसर ॥ ८ ॥ सीरोही सुरपुर अवतार, गढमढ मंदिर पोलि पगार । कणयकलस धजदंड विसाल, दीसह देउल नयण रसाल ॥९॥ खरतर वसहिं संतिजिणंद, भविय-कमल पडिबोहदिणंद । बिहु चेइ सिरि आदिजिणंद,अजियनाह किरि पूनिमचंद॥१०॥ भास नाभिराय-घरि सोहल उ ए, सामिय रिसह जिणंद । मंकोडइ थिरथी रह्यउ ए, तिहुयण नयणाणंद ॥ ११ ॥ मंडवाडि पहु पासजिण, कज्जल कोमल काय । नीतोडइ सिरिआदिपहो, सुरनर वंदिय पाय ॥ १२ ॥ पोसोनई तिरि पढमजिण, बिहुँ चेइ सिरि संति । पास वीर रंगि पूजीयइ ए, टालइ निज मनि भ्रंति ॥१३॥ मटोडइ महिमानिलउ ए, सोहग सुंदर पास । महावीरपहु आगियह ए, तोडह भवदुह पास ॥ १४ ॥ नयर वडाली संतिजिण, तिहुयण पणमिय सामि । इडर नयरह दुन्नि जिण, रिसह पास सिवगामि ॥ १५ ॥ चंदप्पहपहु भेटियइ ए, ओडा नयर मझारे । अ कम्म अरि निजणीय, जो पहु गउ भवपारे ॥१६॥ Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

Loading...

Page Navigation
1 ... 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134