Book Title: Paryushanadyashtahnika Vyakhyanam Author(s): Kshamakalyanak, Publisher: Shravak Hiralal Hansraj View full book textPage 4
________________ अठ्ठाण जाहेरखबर. नीच लखलां पुस्तको पानाने ग्राकारे शुद्ध करीने सारा मोटा जैनी टाइपोमां aurs तैयार येतां बे. मगाववाश्री वी. पी. श्री मोकलवामां आवशे. ( श्रोमीज नकलो बाकी रहेली बे.) श्री कल्पसूत्री सुखबोधिका टीका मूलसहित - ( कर्त्ता विनय विजयजी उपाध्याय ) रु.६-०-० श्री श्राव्याख्यान- - ( कर्त्ता श्रीक्रमाकल्याणकजी )... ...रु.०-५-0 ...रु.०-८-० श्री पाकिकसूत्रावचूरिः -- ( संस्कृत ) ... ...रु.०-४-0 श्री साधुपतिक्रमणसूत्रावचूरि: (संस्कृत) श्रीयुक्तप्रकाश सटीक - ( कर्त्ता पद्मसागरगणी ) स्याद्वादकलिका - अष्टकानि च रु.०-०-० श्री मिलचरित्र श्लोकबद्ध - ( कर्त्ता श्रीजयशेखरसूरिः ) ...रु. ३-०-० Jain Education International ... ... पुस्तको मलवानुं ठेकाणुं - श्रावक हीरालाल वि. हंसराज. ( टपालखर्च जूटुं समजं ) ६ जामनगर - ( काठीयावाम ) For Personal & Private Use Only व्यro www.jainelibrary.orgPage Navigation
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