Book Title: Jain Darshan Me Tattva Aur Gyan
Author(s): Sagarmal Jain, Ambikadutt Sharma, Pradipkumar Khare
Publisher: Prakrit Bharti Academy

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Page 688
________________ 8. डॉ. महेन्द्रनाथ सिंह, उत्तराध्ययन और धम्मपद का तुलनात्मक अध्ययन (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1986 9. डॉ. त्रिवेणीप्रसाद सिंह, जैनदर्शन के परिप्रेक्ष्य में मानव व्यक्तित्व का वर्गीकरण (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1987 10. डॉ. उमेशचन्द्र सिंह, जैन आगम साहित्य में शिक्षा, समाज एवं अर्थव्यवस्था, (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1987 11. डॉ. रज्जन कुमार, जैनधर्म में समाधिमरण की अवधारणा, (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1987 12. डॉ. (श्रीमती) रीतासिंह, प्राकृत और जैन संस्कृत साहित्य में कृष्ण कथा (का. हि.वि.वि. वाराणसी), 1989 13. डॉ. इन्द्रेशचन्द्र सिंह, जैन साहित्य में वर्णित सैन्यविज्ञान एवं युद्धकला (का. हि.वि.वि. वाराणसी), 1990 14. डॉ. श्रीनारायण दुबे, जैन अभिलेखों का सांस्कृतिक अध्ययन, (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1990 15. डॉ. (श्रीमती) संगीता झा, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में आचार्य हरिभद्र का अवदान (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1990 16. डॉ. धनंजय सिंह, हरिभद्र का योग के क्षेत्र में योगदान (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1991 17. डॉ. (श्रीमती) गीता सिंह, औपनिषदिक साहित्य में श्रमण परम्परा के तत्त्व (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1991 18. डॉ. (श्रीमती) अर्चना, भाषा दर्शन को जैन दार्शनिकों का योगदान (का.हि. वि.वि. वाराणसी), 1991 19. डॉ.(श्रीमती) मंजूला भट्टाचार्य, जैन दार्शनिक ग्रन्थों में ईश्वर कर्तृत्व की समालोचना (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1992 20. डॉ. रवीन्द्रकुमार, शीलदूत एवं संस्कृत दूतकाव्यों का तुलनात्मक अध्ययन (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1992 21. डॉ. के.वी.एस.पी.बी. आचार्युलु, वैखानस जैन योग का तुलनात्मक अध्ययन (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1992 22. डॉ. जितेन्द्र बी. शाह, द्वादशार नयचक्र का दार्शनिक अध्ययन, (का.हि.वि. वि. वाराणसी), 1992 23. श्री असीमकुमार मिश्र, ऐतिहासिक अध्ययन के जैन स्रोत और उनकी प्रामाणिकता : एक अध्ययन (का.हि.वि.वि. वाराणसी), 1996 सागरमल जीवनवृत्त 675

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