Book Title: Jain Darshan Me Tattva Aur Gyan
Author(s): Sagarmal Jain, Ambikadutt Sharma, Pradipkumar Khare
Publisher: Prakrit Bharti Academy
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49. जैन धर्म एवं दर्शन, प्राच्य विद्यापीठ, शाजापुर (म.प्र.) 2015.
50. नीतिशास्त्र के इतिहास की रूपरेखा (हेनरी सिजविक की पुस्तक का हिन्दी अनुवाद), प्राच्य विद्यापीठ, शाजापुर (म. प्र. ) 2017
ग्रंथों की विस्तृत प्रस्तावनाएँ
1. चरणकरणानुयोग, द्वितीय खण्ड की विस्तृत भूमिका, मुनि कन्हैयालालजी 'कमल', आगम अनुयोग प्रकाशन ट्रस्ट, अहमदाबाद
जैन तीर्थों का ऐतिहासिक अध्ययन, डॉ. शिवप्रसाद, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध, संस्थान, वाराणसी
प्रमुख जैन साध्वियाँ और महिलाएँ, डॉ. हीरालाल बोर्डियाँ, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध, संस्थान, वाराणसी
स्याद्वाद और सप्तभंगी, डॉ. बी. आर. यादव, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान,
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चन्द्रध्वेध्यक-प्रकीर्णक, अनुवादक डॉ. सुरेश सिसोदिया, आगम अहिंसा समता एवं प्राकृत संस्थान, उदयपुर
महाप्रत्याख्यान प्रकीर्णक, अनुवादक डॉ. सुरेश सिसोदिया, आगम अहिंसा समता एवं प्राकृत संस्थान, उदयपुर
तंदुल वैचारिक प्रकीर्णक, अनुवादक डॉ. सुरेश सिसोदिया, आगम अहिंसा समता एवं प्राकृत संस्थान, उदयपुर
देवेन्द्रस्तव प्रकीर्णक, अनुवादक - डॉ. सुरेश सिसोदिया, आगम अहिंसा समता एवं प्राकृत संस्थान, उदयपुर
10. द्वीपसागर प्रज्ञप्ति प्रकीर्णक, अनुवादक डॉ. सुरेश सिसोदिया, आगम अहिंसा समता एवं प्राकृत संस्थान, उदयपुर
11. Lord Mahavira, इसका फ्रेंच भाषा का संस्करण भी प्रकाशित है और उसमें भूमिका का फ्रेंच अनुवाद भी है, डॉ. बूलचंद्र जैन, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान, वाराणसी
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इसिभासियाइ, अनुवादक विनयसागरजी, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान, वाराणसी
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12. जिनवाणी के मोती, डॉ. दुलीचंद्र जैन, जैन विद्या अनुसंधान प्रतिष्ठान, मद्रास 13. द्रव्यानुयोग की विस्तृत भूमिका, मुनि कन्हैयालालजी, आगम अनुयोग ट्रस्ट,
अहमदाबाद
14. पंचाशक-प्रकरणम् की विस्तृत भूमिका, हरिभद्र सूरि, पार्श्वनाथ विद्याश्रम शोध संस्थान, वाराणसी
सागरमल जीवनवृत्त
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