Book Title: Hindi Jain Sahityame Rahasya Bhavna
Author(s): Pushplata Jain
Publisher: Sanmati Prachya Shodh Samsthan

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Page 454
________________ 32. 438 हिन्दी जैन साहित्य में रहस्यभावना 29. The Verities of Religious Experience, a study in human nature, Longmans, 1929, P. 429 ३०. भक्तिकाव्य में रहस्यवाद, पृ.१२ पर उद्धृत Mysticism is seen to be a highly specialized form of that search for reality for heightened and completed life, which we have found to be a constant characteristic of human consciousness. Mysticism in Newyork, 1955, P. 93 (Practical Mysticism by Under Hill.) Practical Mysticism by Under Hill, P. 3, भक्तिकाव्य में रहस्यवाद से उद्धृत, पृ-१३ Mysticism Dictionaries by Frank Gaynor; भक्तिकाव्य में रहस्यवाद से उद्धृत, पृ-१३ 34. Mysticism is a way of dealing with God. New Haven, 1912, P. 355; रहस्यवाद-परशुराम से उघृत, पृ-२० ३५. हिन्दीजैन भक्ति काव्य और कवि,पृ. ५ ३६. बनारसी विलास, ज्ञानवावनी, पृ.६ ३७. वही परमार्थहिन्डोलना, पृ.५ ३८. हिन्दी पद संग्रह, पृ. ३-३७ ३९. वही, पृ.१११ ४०. ब्रह्मविलास, शत अष्टोत्तरी, ९८ ४१. वही, १०१। ४२. वही, पुण्य पापजगमूल पच्चीसी, पृ.१८ ४३. वही, परमात्म शतक, पृ. २९ ४४. जैन शतक, पृ.९१ ४५. अध्यात्म पदावलि, पृ. ३५९ ४६. ज्ञानदर्पण, ४,४५, १२८-१३० आदि ४७. Heart of Hindustan (भारत की अन्तरात्मा) अनुवादक-विश्वम्भरनाथ त्रिपाठी, १९५३, पृ. ६५ ४८. आचार्य परशुराम चतुर्वेदी, रहस्यवाद, पृष्ठ.९

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