Book Title: Anusandhan 2016 09 SrNo 70
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

View full book text
Previous | Next

Page 11
________________ अनुसन्धान-७० प्रमोदेन मनो नृत्य, रोमाञ्चैर्वपुरुल्लस । चिरादुन्मीलि(ल?)तं नेत्रे, ननु वीरवरोऽग्रतः ॥३।। अजन्मदायिने पित्रे, बान्धवायाऽविरोधिने । अद्रोहिणे चाऽ(च)मित्राय, श्रीवीर ! भवते नमः ॥४॥ श्रीवीरसद्ध्यानमयाग्निमग्नं, सङ्क्लिष्टभावार्जितकर्मकक्षम् । . भस्मीभवत्वाशु विरागिणो मे, तथा यथा नित्यसुखीभवामि ॥५॥ ॥ इति श्रीमहावीरस्वामिलघुस्तोत्रम् ॥ इति जिनपतिपादपञ्चचञ्चद्विचारैः सुललितसुगमार्थे-नव्यकाव्यैः कथञ्चित् । कृतसमुचितसेवा सेवकानां जनानां जनितमधुरबोधा बोधिलाभाय सन्तु ॥२६।। ॥ इति पञ्चती कर स्तोत्रम् ॥ . ॥ पं. चारुदत्तगणिलिपीकृतम् ।। ॥ श्रीरस्तु लेखक-पाठकयोः ।

Loading...

Page Navigation
1 ... 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 ... 170