Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba
View full book text
________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
२४
मार्च - २०१३ कमलामेला कुंयरि बइठी, देखी पिता मनि चिंता पइठी, उग्रसेनसुत नभसेन चंगइं, तास प्रति दीधी मनरंगि. ८ करि कमंडल वेणा सोहि, अक्षमाला नारद मन-मोहि, रिषि आविउ नभसेन कि मंदिरि, ऊभउ रहिउ देखि निज भरि. ९ कन्या लाभइ कुंयर गहिगहितउ', नवि पेखिउ रिषि जातउ,
विहतउ ऊठी नवि तस आसन दीण, विनय न आवि घुण्यविहीण. १० भणीयं च :
विणउ आवई सिरि लहइ, विणीउ जसं च कित्तिं च, न कयावि दुब्विणीउ, सकज्जसिद्धि समाणेई. ११
। [उपदेशमाला, गाथा नं. - ३४२] को चित्ते इम पूरं गयं, च कुणइं राजहंसाण, को कुवलयाण गंधं, विणयं च कुलप्पसूयाणं*. १२
चालि।। नभसेन उपरि नारद कोपिउ, देखउ विनय पणि अधमि लोपिउ
तउ हिवि सीख देसिउं सुविचारी, देखि द्रष्टि किसिउ अहंकारी. १३ ॥श्लोक।।
ऐश्वर्यतिमिरं चक्षुः पश्यंतोऽपि न पश्यं(य?)ति। पुनर्निर्मलतां याति दारिद्रांजन भेषजात् ।।१४।। [ ] संपदि यस्य न हर्षो विपदि विषादे रणे च धीरत्वं । तं भूवनत्रयतिलकं जनयति जननी सूतं विरलं ।।१५।। [ ]
॥चालि।। सागरचंद घरि रिषि आविउ, दरिसन देखतउ कुमरनइ भाविउ, ऊभउ थइ तस आसन दीध, भलइं पधार्या ! कारिज सीध. १६ निषधपुत्र करयोडी भाखि, नारदसिउं छांनू नवि राखि, निज ईछ्याइं भमत भुपीठि, कहउ कोई वात दीठी रस-मीठि. १७ उत्तरार्धना बे पाद उपदेशपद गाथा नं.-१००५ मां मळे छे.
For Private and Personal Use Only

Page Navigation
1 ... 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84