Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba
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मार्च - २०१३ धन ! धन ! मोरो तात, जिणि एतादिन पालिउ, नवि जाणिउ कोई दुख, बहु जतनइं संभालिउ. ३१ करता अणखि केई साध, ते वयरमुनि अब बालिउ, वसतिथी काढिउ आज, इणि वेला परजालिउ. ३२ शनि शनि भरतउ पाय, आइ वीसामो लीधउ, रद्धिमंत घरि उच्छांह, पामी कारिज सीधउ. ३३
ढाल-४।। रबारी के छोहरा फाग।। तिणि समई रमणी सेठ की, आई गउखि निहालि रे, सुंदर मुनि देखि खडउ, कांमि करी चित चालइ रे. ३४ मनमोहिउ मुनि देखिनइं, रूपि रतिपति जाणुं रे, . रंग लागउ तिणिसिउं भलउ, ए ए काम विन्नाणुं रे. ३५
मनमोहिउ मुनि... निज दासी तेडी करी, चतुरपणइं सीखाई रे, जाइ मुनि तेडु ईहां, होवि प्रीति सवाई रे, ३६
मनमोहिउ मुनि.. गई दासी ऊतावली, आणिउ मुनि घरमांहि रे, पडिलाभई ललनां तदा, मोदक अधिक ऊछांहि रे. ३७
मनमोहिउ मुनि... देई दानसु मनपूरई, लोचन मांडी निरखि रे, भाव जणावि आपणउ, मुनि देखी दिल हरखि रे. ३८
___ मनमोहिउ मुनि... वनिता करि भली वीनती, आगइ रही करजो रे, काहु करउ तप दोहिलउ, जोविनवई एह खोडि रे. ३९
मनमोहिउ मुनि... रहउ इणि मंदिरि मुनिवरू, भोगवो उत्तम-भोगा रे, जोवि(व)न लाहउ लीजीयइ. हम-तुम भला संजोगा रे. ४०
मनमोहिउ मुनि...
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