Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba

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Page 55
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org श्रुतसागर - २६ तस पखि वाचक चतुरशिरोमणी, विवेकशेखरगणिचंदोजी, तस शिष्य विजयसे (शे) खर एणी परि, कहि अरणकचरित आणंदोजी. ७७ धन-धन अरणक... भणउ सुणउ चतुरनर भावसिउ, साध तणा गुण रंगइजी, सफल जंवारउ" थाय तेहनउ, पांमइ सुख सही अंगइंजी. ७८ ।। इति श्रीअरणकमुनि रास संपूर्ण । 2 Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir शब्दार्थ 1 सागरचंद रास १. सहाय, २. प्रगट, ३. रसिक, ४. कमळ, ५. आनंद पामवु, ६. आश्चर्य, ७. कौतुक, ८. जल्दी, ९. सत्वहीन, १० चितामां प्रवेशी बळी मरवुं, ११. भाग्य, १२. विभासण, १३. साथे १४ स्थान, १५. क्रीडा, रमत, १६. कहेयुं, १७. दाव, १८. दानादि सुकृत कार्य, १९. समारंभ, आनंदोत्सव २० सुंदर स्त्री, २१. शरणाइ, २२. उत्तम, २३. मोढुं उतरी जनुं २४. सैन्य, २५ ठपको, २६. सहन करे, २७. कलंक, २८. समजावयुं २९. चूप, खामोश ३०. बाण, ३१. भाग्यवान, ३२. खराब, ३३. [घात ? ], ३४ झरूखो, ३५ नठारा, ३६. बच्चे-बच्चे, ३७. स्मशान, ३८. चिता, ३९ प्रसिद्ध ४० प्रचुर [ पुण्यप्रचुर ], ४१. शत्रु ५३ For Private and Personal Use Only धन-धन अरणक... अरणिकमुनि रास १. उत्साहपूर्वक, २. दाक्षिण्य, ३. आसक्ति, ४. शरीर, ५ माछली, ६. रोष, ७. उत्साह, ८. खोड ९. भ्रष्ट [ ओसन्न ], १० ख्याल न रहेनुं, ११. पिचकारी, १२. गौरव, १३. केकारव, १४. शियाळो, १५. घेली, १६. अशुभ, १७. नजर, दृष्टि, १८. दुःखमां, १९ झरुखो, २०. सुंदर, २१ विरूप, २२. विस्तार, २३ जन्म, अवतार.

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