Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba

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Page 51
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir श्रुतसागर - २६ हम पति रहिउ बिदेस ति, छोरी नेह का पासा रे, रहुं एकेली भुवनमई, पूरि(रो) हमारी आसा रे. ४१ मनमोहिउ मुनि... एहु कथन ऊवेखउ मा, देखु हु चिति विचारी रे, तन-धन ए सब ताहरउ, जाऊंगी बलिहारी रे. ४२ मनमोहिउ मुनि... सूणी सराग ब(व)चनि तिस्यां, काचउ कुंभ जिउं भीनो रे, अगनि द्रढ रहि मीण किसिउं, बोल भलउ मुनि दीनो रे. ४३ ___ मनमोहिउ मुनि... थयु ऊसन्नउ व्रत छोरी, लाजकाणि सवि भागी रे, मोहनगरीवासी मुनई, पुण्यदिसी इसी जागी रे. ४४ मनमोहिउ मुनि... गीत-विनोद-कथारसि, भोगवि भोग सुरंगा रे, विगति लहि नवि दिवस की, खेलई बसंत सुचंगा रे. ४५ मनमोहिउ मुनि... कस्तूरी कुरु-कूमकूमां, केसर-चंदन-केलि रे, नाखइं पिचरकि' भरि-भरी, ऊडइं गुलालसु मेलि रे. ४६ मनमोहिउ मुनि... ग्रीषमरति गुण गुरवइं२. प्रीणइं प्रीति प्रधान रे, खेलि खडोखली जल भरी, कुसुम सेजि सुविधान रे. ४७ मनमोहिउ मुनि... वरिषा वनिता परिसेवइं, राजई केकीनादो'२ रे, विरह गयउ घन गाजतई, नेहिं किसिउ हठवादो रे. ४८ मनमोहिउ मुनि... तुरत हेमालउ हरखसिउं, सेवइं कुमर जूवानो रे, नाही रहि थिर चिति करी, उस कहि सुनिदांनो रे. ४९ मनमोहिउ मुनि... For Private and Personal Use Only

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