Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba
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श्रुतसागर - २६
प्रज्ञप्ती-विद्याबलि आंणी, कमलामेला तांमजी, द्वारिका परिसरि वनमई बिठा, शांबकुमर अभिरामजी. ६४
इम कमलामेला.... धूनउं लगन साधीयु धस-मसि, आरिमकारिम कीधजी, सागरचंद परिणाविउ प्रेमि, पुण्यइं कारिज सीधजी. ६५
इम कमलामेला.... ढाल-चुथी।। चंद्राउलानी देसी।। ऊग्रसेन घरि एहवि रे, करइ वीवाहनउ जंगो१९, धवल-मंगल गायइं गोरडी० रे, वाजइ तूर१ सुचंगो. १
टक।। वाजई तूर सुचंगइ छंदइ, यादव-यान चडी नरवृंदइ, रथ पायक हाथी सुखकंदइ, घोडि चडिउ वर आवि आणंदि. १ जी राजेसर जी रे कमलामेला हेति, नभसेन आवीयउ रे, धनसेनमंदिर तेति, तोरणि भावीयउ रे. २
जी राजेसर .... (आंकणी) तेहवि अंतःपुरि ऊछली रे, हाहा-रवनी वातो, धाउ रे धाउ ऊतावला रे, वेगई सूभट संघातो. २
जी राजेसर.... [टक।। सूभट संघात हथीयारे सनूरा, धाया धसमसता सवि सूरा, जीत साल अंगई संपूरा, आव्या सामि पासि हजूरा. ३
जी राजेसर.... कमलामेला कन्या भली रे, ए गयो कोई चोरो, अमंगल वात सुणी करी रे, परिजन करि सवि सोरो. ७१
जी राजेसर....
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