Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba
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३०
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यतः
कमलामेला मेलउ मुझनि, जंपिउ" तेणि बोलिजी,
वचन कहिउं सो पडिवनुं पालउ, नट मत जाउ निटोलजी. ५६
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अलसायंतेण सज्जणेण जे अक्खरा समुल्लवीया । ते पत्थर टंकु की यव्व न हु अन्नहा हुंति. ।। ५७ ।। [
/ /चालि ।।
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इम कमलामेला.....
मार्च - २०१३
शांबकुमर कहइ वचनबलई हुं, बांधिउ बोलतां आजजी, कहउ कुठामि गड दुखि वहून सुसरा वैद्यसिउं काजजी. ५८
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इम कमलामेला....
आगइ उग्रसेनसूतनि ए दीधी सूता सुविचारिजी, हिवि कहउ सि कीजइ ईहा कणि, वाघ कूप परि सारजी. ५९
तउ हिवि कोईक दाय" रचीनि करसिउं वचनप्रमाणजी, ऊत्तम तणा बोल नवि खोटा, ऊतर मेघ मंडाणजी * . ६०
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इम कमलामेला.....
इम कही जंबुवतीनउ नंदन, गयउ प्रद्युमन पासइजी, वात कही कमलामेलानी, राग तणी सुविलासइजी, ६१
इम कमलामेला.....
इम कमलामेला.....
यतः
जत्तिय मित्तो नेहो, तत्तिय मित्तो अनवरि संतावो । ऊज्झिय तेहं न हु कुंकुम, पिता विजइ जणेण ।। ६२ ।। [ I
।। चालि ।।
रूकमणीनंदन वचन न लोपि, शांबकुमर केरी साथिजी, दिन निजीक जांणी वीवाहनउ, लेई हथीयार सूहाथिजी. ६३
इम कमलामेला....
जे काळा- घेरायेला वादळो अवश्यमेव जळ वरसावे छे तेम महापुरुषो पोताना वचनो पण अवश्यमेव पाळे छे.

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