Book Title: Shrutsagar Ank 2013 03 026
Author(s): Mukeshbhai N Shah and Others
Publisher: Acharya Kailassagarsuri Gyanmandir Koba

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Page 39
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ३७ श्रुतसागर - २६ ढाल-आठमी 11 लारवा फूलांणीना गीतनी-देसी।। इणी परि सागरचंद खिमा, गुणि करी जगमई परगडउ९, तिणि परि भविका जाणि ऊपसम-रस, आणउ मनि ए वडउ. २० जांणी जिनधर्म सार क्रोध, कषाय करउ सवि वेगलउ, परिहरउ मोहनिद्रोह जिम जंग, जीपो सधलउ अतिभलउ. २१ चंद्रकला सम एह साध तणा, गुण अतिहिं मनोहरू, रसना थाइ पवित्त लाभ, अनंतो हुइ वली सुखकरू. २२ श्रीअंचलगछि आनंदचंद्रकुलई, विधिपक्ष साखा जाणीयइं, भट्टारक गुणवंत श्रीकल्याणसागरसूरि साध वखाणीयइं. २३ तस पखि पुण्यपडूरि वाचक, श्रीसत्यशेखर सुभमती, तस शिष्य ताजइ नूरि, विवेकशेखरगणि वाचक सुविहिती. २४ पांमी तास प्रसाद सागरचंदमई, गायउ हितकरी, चतुर रसिक वेधाल सूणसई, चउपई एह हरख धरी. २५ संवत सोलसई साच उगण्यासीयइं, वरसि वली मई रची. महाशुदि बीज प्रधान, बुधवारइं बुधई करी मची. २६ जेसलमेर मझारि पास, जिणेसर महिमा दीपतउ, श्रीसंघनि सुखकार संपति, घि[घरि घरि अरीयण जीपतउ. २७ सागरचंदचरित्र आवश्यकसूत्रइं, जोय्यो वली वली, विजयशेखर कहि प्रेमइ, मूनि मोटाना गुण गातां रली. २८ इति श्रीसामायकविषये सागरचंदमूनि रास संपूर्ण ढाल ज करी नव।लिरिवतं ऋ. आंबा।। For Private and Personal Use Only

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