Book Title: Shesh Vidya Prakash
Author(s): Purnanandvijay
Publisher: Marudhar Balika Vidyapith

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Page 151
________________ शेष विद्या प्रकाश :: :: १२१ पउदा (चांदणिया) विनाशक चांदणियां चांदणियों चांदणियां चांदणियां ने आगी नाखो भला होवे ला थांरो । पदमणि जी पियु से फरमावे दोष कांई है म्हारो चांदणियां मे घाल घाल ने बिना मोत क्यु ? मारो चांदणियां पाछा निर्वल हुआ बालमु छिपा छिपाने राखो । मर्द हुमा क्यु ? पालो पडदो खुली हवा में राखो चांदणियां पहोचावण वाली नहीं मिले जब हाथा जोडी करणी जीणां जीणां री गरजां करतां लाजे थारी परणी चांदणियां किल बिल किल बिल करतां चाली सांडीया मारी भेटी एक उछल गई दूजी नाठी तीजी लांबी लेरी चांदणियां सज्जन ऐसा पडदा सु तो लुगायां दुःख पावे दिन दिन रोगी होती जावे टी. बी. सू मर जावे चांदणियां संवत् दो हजार वर्षे चैत्र सुदी दूजे जोधाणारी रेल मे तो सत्तावत् बोले चांदणियां Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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