Book Title: Rajprashniya Sutra
Author(s): N V Vaidya
Publisher: Khadayata Book Depot
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- १५४
निकुरुंबभूया, ते णं पायवा मूलमंतो कंदमंतो खंदमंतो तयमंतो पवालमंतो पत्तमंतो पुप्फमंतो बीयमतो फलमंतो अणुपुव्वसु. जायरुइलवट्टपरिणया एगखंधा अणेगसाहप्पसाहविडिमा अणे. गनरवामप्पसारियअगेज्झघणविपुलवट्टखंधी अच्छिद्दपत्ता अ. विरलपत्ता अवाइणपत्ता अणीइयपत्ता निद्धयजरढपंडुपत्ता नवहरियभिसंतपत्तभारंधयारगंभीरदरिसणिजा उवणिग्गयवरतरुः णपत्तपल्लवकोमलउजलचलंतकिसलयकुसुमपवालपल्लवंकुरग्गसिहरा निञ्च कुसुमिया निच्चं मउलिया निच्चं लवइया निञ्चं थवइया निच्चं गुलइया निच्चं गोच्छिया निच्चं जमलिया निश्चं जुलिया निचं विणमिया निच्चं पणमिया निच्चं कुसुमियमउलियलवइयथवइयगुलइयगोच्छियजमलियजुवलियविणमियपण. मियसुविभत्तपडिमंजरिवडंसयधरा सुयबरहिणमयणसलागा. कोइलकोरकभिंगारककोंडलजीवंजीवकनंदीमुखकविंजलपिंगलक्खगकारंडचक्कवागकलहंससारसअणेगसउणमिहुणवियरियसदइयमहुरसरनाइयसंपिडियदरियभमरमहुयरिपहकरपरिलेंतछप्पयकुसुमासवलोलमहुरगुमगुमंतगुंजंतदेसभागा अभितरपुष्फफलबाहिरपत्तोच्छन्ना पुत्तेहि य पुप्फेहि य उवच्छन्नपलिच्छन्ना नीरोगका मउफासा अकंटगा नानाविहगुच्छगुम्ममंडवगोवसहिया विचित्तसुहके उभूया वाविपुक्खरणिदीहियासु य सुनिवेसियरम्मजालघरगा पिंडिमनीहारिमसुगंधिसुसुरभिमणहरं च गंधद्धणि मुयंता सुहकेऊ केउबहुला अणेगसगडरहजाणजुग्गगिल्लिथिल्लिसीयसंदमाणीपडिमोयणा सुरम्मा इति । अस्य व्याख्या-इह प्रायो वृक्षाणां मध्यमे वयसि वर्तमानानि पत्राणि कृष्णानि भवन्ति ततस्तद्योगात् वनखण्डा अपि कृष्णाः, न चोप-. चारमात्रात्ते कृष्णा इति व्यपदिश्यन्ते किन्तु तथा प्रतिभासनात्, तथा चाह-कृष्णावभासा' यावति भागे कृष्णावभास. पत्राणि सन्ति तावति भागे ते वनखण्डाः कृष्णा अवमासन्ते, Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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