Book Title: Prakarana Ratnakar Part 4
Author(s): Bhimsinh Manek Shravak Mumbai
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

View full book text
Previous | Next

Page 14
________________ कर्मग्रंथ बो. ५३ गाथा २७ बेवटनी बे उपरनी पंक्तिमां ( इक्विक्की बंध विही) पढी तुरत एक नांगो तथा एटला शब्द वधारी एकविध शब्द बे ते जोमी देवो. ५४ गाथा २० पारिग्राफ मामां पांचनुं बादर बहुं पर्याप्त बे ते बदल पर्याप्त अथवा अपर्याप्त एम समजवुं तथा याज गाथामां बे गति वचाले पर्याप्त गएयुं बे ते संजवनी अपेक्षाए समजवुं ५५ गाथा ३३ पारिग्राफ मामां २० ने बंधे 00 नी सत्ता बदल‍नी सत्ता संजवेबे ने तेज गाथामां जिननामनी सत्ता होय ते जिननामनो बंध पण करे. कदाच जो एम लहीये तो नरके जतां पर्याप्तावस्थाए जिननामनी सत्ता होय, पण बंध होतो नथी, माटे सत्ता होय तेने बंध होयज एम नियम नयी अने तेमां १४ मा पारिग्राफमा चोथी पंक्तिमां एटलुं विशेष जे पड़ी तेजकाय तथा एटलुं जोडवा योग्य बे. ५६ गाथा ३० पारिग्राफ पहेलानी 9 मी पंक्तिमा सयोगी केवलीने योगी केवलीनी पेरे बे ते बदल सयोगी ने योगी केवलीने एम गोठवj. ५१ गाथा ४० पारिग्राफ त्रीजानी चोथी पंक्तिमां सात, आठ, नव अने १० ए ४ उदय स्थानक होय ने श्रेणीथी पकी कोई आवे नहीं, माटे 9 नुं उदयस्थानक बाद करी ३ पीना उदय स्थानक होय. ५० गाथा ४१-४२ ना विवेचनमां बेल्लाना उपला पारिग्राफमां २८ ना बंधे ८० नी सत्ता पण ८० बाद करी ते बदल ८ समजवा योग्य वे अने बेला पारिग्राफनी बीजी पंक्तिमा ४ सत्तास्थानक ११ मे गुणठाणे ते पबी आटलं उमेरवुं होय अने आगलना ४ तेर प्रकृतिना कय कर्या पबीना कीणमोहने लेवा एम जोइए. ५० गाथा ६५ त्रीजी पंक्तिमा अने त्रीशनुं तिर्यंच प्रायोग्यज होय ते समीचीन नयी, पण तिर्यंच प्रायोग्य उद्योत सहित त्रीश मनुष्य प्रायोग्य तीर्थंकर सहित त्रीश ३० नुं आम जोइए. ६० गाथा ११ बीजा पारिग्राफनी त्रीजी पंक्तिमां ने उदय उदीरणा विछेद या पी एम बे त्यां उदय शब्द काढी नाखी उदीरणा एकज ग्रहण करवी. ६१ गाथा ५ मीमां चरम समये ५७ सत्ताथी टाली एम बे त्यां वर्ण चतुष्क लीधुं बे. जो १४८ सत्तामां वर्ण वीश ग्रहीए तो ५७ बदल ७३ याय एम समजवुं. ६२ गाथा मां पारिग्राफ पहेलामां बेल्ली ३ पंक्ति उपरनी पंक्तिमां ४७ बदल ५७ करवी. इति. Jain Education International For Private Personal Use Only www.jainelibrary.org

Loading...

Page Navigation
1 ... 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 ... 896