Book Title: Nandisutt and Anuogaddaraim
Author(s): Devvachak, Aryarakshit, Punyavijay, Dalsukh Malvania, Amrutlal Bhojak
Publisher: Mahavir Jain Vidyalay
View full book text ________________
३१४
मूलसदो
मावलियाए
अवलियाए
आवलियाओ
आवसिया
भावस्सए
भावस्पगव
इरितस
अवस्सग
सुक्खंचे
भवस्सगस्स
भावस्सगस्स
आवस्तय०
भावस्पय
निक्खेवो
आवस्सय
वइरित्तस्स
आवस्सस्स
आवस्यं
भावस्सयं
भावस्ये
अवस्सिया
आवंती
आत्रासा
भावासिया
आसणं
Jain Education International
अणुओगद्दारसुप्तपरिसिट्ठाई
सुतंकाइ
४२१ [१]
सक्कत्थो
आवलिकया
आवलिकया- कालमान
विशेषेण
आवलिकाः - कालमानविशेषाः आवश्यकी - सामाचारी
आवश्यक
भेदः २०६ [२]गा.१६
आवश्यकम् ११, १४, १७,
१८, पृ. ६० टि.७, पू. ७५ टि. ३
५३२
आवश्यकश्रुतस्कन्धः
३६७
व्यतिरिक्तस्य ५
आवश्यक
आवश्यक निक्षेपः
आवश्यकाय
आवश्यकस्य ५,६,७३,
७४गा.७
पृ. ६२टि. ५
७१
२२
पृ. ६५
टि. ८
आवश्यकव्यतिरिक्तस्य
पू. ६० टि. १
आवश्यकस्य पृ. ६० टि. १
आवश्यकम् ७, ९,२८,२९,
२९गा. २,२९गा. ३
६
आवश्यकम्
आवश्यकम्
आवश्यकी - सामाचारी
भेदः पृ. १०० टि. २ एतन्नामकमुत्तराध्ययन
सूत्रस्याध्ययनम् २६६ आवासाः - आवासनामक
द्वीप समुद्रार्थे १६९गा.
१४
१०
आवश्यकी - सामाचारीभेदः पृ. १०० टि. २ ४४२, ४४७
आश्रयेण
मूलसदो
आसण
-आसम
आसं
आपाएंग
आसाणं
आसातिए
आपाड़ी
आसा.एण
आसि
आसी
भासुरुक्खं
भासे
भासो
भासोकंवा
आहत चिजं आदम (? त्त) हीयं
आहारए
भाहारए
आहारग० आहारगसरीरा
आहारगं
आहारगा
आहारयसरीरा
आहिता
सक्कयत्यो
सुतंकाइ
आसन
३३६
आश्रम
२६७
अश्वम्
४४६
आस्वादेन पृ. १७५ टि. २
For Private & Personal Use Only
अश्वानाम् ८१,५६७,५६९ आस्वादितेन पृ. १७५ टि. १
अश्वादिः
૪
आस्वादितेन ४४५
आसीत् ४५१, ४८५ आसीत् १७, ३७, ४५५,
५४१, पृ. १८५८. १
शास्त्र विशेषः पृ. ६८ टि. ५ अश्वः - नक्षत्र देवता
विशेषः २८६ गा. ९०
अश्वः - नक्षत्र देवता
विशेषः पृ. १२८ टि. ५
अश्वापक्रान्ता - मध्यम ग्राम.
स्य मूर्छना पृ. ११८.९ याथातथाकम् याथातथा कम्
० आहारगसरीरा आहारकशरीराणि
आहारकः
आहारकम् - शरीरम्
२६६
पृ. १२४
टि. १४
२३७
४०५, ४११ पृ. १६८टि. ९ आहार कशरीगणि ४१५,
"
४१८[३],४१९[३], ४२०[१],४२४[३]
४२०
[४], ४२१[१]
आहारकम् - शरीरम् २३८ आहारकाणि शरीराणि
पृ. १६८टि. ४-५ आहारकशरीराणि ४२०
[३],४२२[२],४२३ [३],४२५[३],४२६[२] आख्याताः पृ. १२० टि. ३
www.jainelibrary.org
Loading... Page Navigation 1 ... 607 608 609 610 611 612 613 614 615 616 617 618 619 620 621 622 623 624 625 626 627 628 629 630 631 632 633 634 635 636 637 638 639 640 641 642 643 644 645 646 647 648 649 650 651 652 653 654 655 656 657 658 659 660 661 662 663 664 665 666 667 668 669 670 671 672 673 674 675 676 677 678 679 680 681 682 683 684 685 686 687 688 689 690 691 692 693 694 695 696 697 698 699 700 701 702 703 704 705 706 707 708 709 710 711 712 713 714 715 716 717 718 719 720 721 722 723 724 725 726 727 728 729 730 731 732 733 734 735 736 737 738 739 740 741 742 743 744 745 746 747 748 749 750 751 752 753 754 755 756 757 758 759 760 761 762 763 764