Book Title: Jine ke Usul
Author(s): Chandraprabhsagar
Publisher: Jityasha Foundation
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११८
जीने का उसूल सलाह
बिना मांगे सलाह देना चलते आदमी को लंगड़ी मारना है।
सलाह/गलती
गलत काम कर चुकने वाले को सलाह मत दो, क्योंकि वह गलती खुद उसे सीख दे सकती है।
सहजता
जन्म और मरण हमारे हाथ में नहीं हैं अत: फिर जीवन की व्यवस्था भी क्यों न हम उसी के हाथ में सौंप दें, जिसके हाथ में जन्म और मरण हैं।
सहज प्रार्थना
संस्कृत के अबूझ स्तोत्र-पाठ से आत्म-समर्पित भक्त की सहज प्रार्थना अधिक सशक्त होती है।
सहनशीलता
सहनशीलता मनुष्य का सद्गुण है, किन्तु लाचार बनकर सब कुछ सहन करते जाना दुर्गुण है।
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