Book Title: Dada Shree Jinkushalsuri
Author(s): Agarchand Nahta, Bhanvarlal Nahta
Publisher: Shravak Sangh

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Page 109
________________ समस्त सामग्री प्रतिष्ठा तणी तउ मेलि हिव किम कीजियइ !, तिवारह श्रीउद्धरण तणी कलत्र खरतरांनी दीकरी हुंती, तिणि काउ-श्रीजिनपतिमूरि कन्हां प्रतिष्ठा करावउ, तिवार प्रतिष्ठा करावी मस्तकि वास घताव्या खरतर हुआ। "बारसए पणयाले, विक्कमसंबच्छराउ वइक्कते। ऊद्धरणकेडपमुहा, छाजहड़ा खरतरा जाया ॥ १ ॥ - अजे सीम उद्धरण छाजहरू तणउ केड़ खरतर हवउ । श्रीउद्धरण मुंहतानउ पुत्र कुलधर मंत्रीधर प्रवत्र्य उ, तिणि कुलधरि श्रीजिनेश्वरसूरि तणइ वारइ श्रीवाहड़मेरि उत्तुंगतोरण प्रासाद कराव्यउ । तेह तणइ वंशि श्रोजिनभद्रमूरि सरीखा गुणवंत गुरु प्रवर्त्या । श्री॥ અમારા સંગ્રહના એક પ્રાચીન પત્રથી ઉદ્ધત. 卐4 卐 Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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