Book Title: Agam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Part 01 Sthanakvasi
Author(s): Artibai Mahasati, Subodhikabai Mahasati
Publisher: Guru Pran Prakashan Mumbai
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शत:-3:6देश-२
| ४१३ ।
जाव दोच्चं पि वेउव्वियसमुग्घाएणं समोहणइ, एगं महं घोरं घोरागारं भीम भीमागारं भासुरं भयाणीयं गंभीरं उत्तासणयं कालड्डरत्तमासरासिसंकासं जोयणसयसाहस्सीयं महाबोंदि विउव्वइ, विउव्वित्ता अप्फोडेइ, अप्फोडित्ता वग्गइ, गज्जइ, हयहेसियं करेइ, हत्थिगुलगुलाइयं करेइ, रहघणघणाइयं करेइ, पायदद्दरगं करेइ, भूमिचवेडयं दलयइ, सीहणादं णदइ, उच्छोलेइ, पच्छोलेइ, तिवई छिंदइ, वाम भुयं ऊसवेइ, दाहिणहत्थपदेसिणीए अंगुट्ठणहेण य वितिरिच्छमुह विडंबेइ, विडंबित्ता महया महया सद्देण कलकलरवं करेइ, एगे अबीए फलिहरयणमायाय उड्डे वेहासं उप्पइए खोभंते चेव अहोलोयं, कंपेमाणे च मेइणीतलं, आकडंते व तिरियलोयं, फोडेमाणे व अंबरतलं, कत्थइ गज्जते, कत्थइ विज्जुयायंते, कत्थइ वासंवासमाणे, कत्थइ रयुग्घायं पकरेमाणे, कत्थइ तमुक्कायं पकरेमाणे, वाणमंतरे देवे वित्तासमाणे, जोइसिए देवे दुहा विभयमाणे, आयरक्खे देवे विपलायमाणे, फलिहरयणं अंबरतलंसि वियट्टमाणे, वियट्टमाणे विउब्भाएमाणे, विउब्भाएमाणे ताए उक्किट्ठाए जाव तिरियमसंखेज्जाणं दीव समुद्दाणं मज्झमज्झेणं वीईवयमाणे जेणेव सोहम्मे कप्पे, जेणेव सोहम्मवडेसए विमाणे, जेणेव सभा सुहम्मा तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता एगं पायं पउमवरवेइयाए करेइ, एगं पायं सभाए सुहम्माए करेइ; फलिहरयणेणं महया महया सद्देणं तिक्खुत्तो इंदकीलं आउडेइ, आउडित्ता एवं वयासी- कहि णं भो! सक्के देविंदे देवराया ? कहि णं ताओ चउरासीइसामाणिय- साहस्सीओ ? जाव कहि णं ताओ चत्तारि चउरासीईओ आयरक्खदेवसाहस्सीओ? कहि णं ताओ अणेगाओ अच्छराकोडीओ ? अज्ज हणामि, अज्ज वहेमि, अज्ज ममं अवसाओ अच्छराओ वसमुवणमंतु त्ति कटु तं अणिटुं अकंतं अप्पियं असुभं अमणुण्णं अमणामं फरुसं गिरं णिसिरइ । शEार्थ :- भासुर = (भा२१२, उत्तासणयं = त्रास ४, कालड्ढरत्तमासरासि संकासं = ॥ पक्षनी आणी सई रात्रि भने सऽहनी राशि सभान , महाबोदि = भोटुं शरीर, अप्फोडेइ = &थ ५७।ऽया, वग्गइ = 69वा-हवा साया, पायदद्दरग = ५॥ ५७।ऽया, गज्जइ = गईन। ॐरी, हयहेसियं करेइ = घोडानी भाडया, उच्छोलेइ = 69वाया, तिवई छिदइ = त्रिपही छेवा साया, वामं भुयं ऊसवेइ = stी भुथी ४२वा साया, दाहिण हत्थ पदेसिणीए = ४भए॥ डायनी तर्जनी जी अने अंगूठान नपथी, तिरिच्छमुहं विडंबेइ = भुपने त्रासुरीने विऽमित ४२१॥ साया, वेहासं = साशने, मेइणीतलं = (भूमितसने, आकडूंते संभुपयता डोयतेभ, रयुग्घायं

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