Book Title: Aagam 40 Aavashyak Choorni 01
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Deepratnasagar
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आगम
(४०)
प्रत
सूत्रांक
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दीप
अनुक्रम
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अध्ययनं [-] मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता
श्री आवश्यक
चूर्णां
॥ १ ॥
“आवश्यक”- मूलसूत्र-१ (निर्युक्ति:+चूर्णि:) मूलं [- /गाथा -], निर्युक्ति: [-], भाष्यं [-] आगमसूत्र [४०], मूलसूत्र [०१] “आवश्यक" निर्युक्तिः एवं जिनभद्रगणि-रचिता चूर्णि:-1
॥ श्रीजिनदास गणिमहत्त रकृता श्री आवश्यकचूर्णिः ॥
नमो अरहंताणं । नमो सिद्धाणं । नमो आयरिआणं । नमो उवज्झायाणं । नमो लोए सव्वसाहूणं । काउण णमोकारं तित्थकराणं तिलोकमहिताणं । आयरिउज्झायाणं णमिऊणं सव्वसाहूणं ॥ १ ॥ कति सुसीसो आयरियकुलवासी जातिकुलरूव सुयायारसत्तविणयसंपण्णो ण दुर्गुडिओ अभीरू सत्तिजुओ विणीतो गंभीरो अदीणो ण रूसणो ण कुसीलो ण चवलो ण बहुभासी ण गारचिओ ण तुरिओ असंपसारो ण पिसुणो ण परोपतापी ण अतद्गुरुओ ण मच्छरी ण अकयण्णू ण अहच्छंदो ण मंदो ण संदिद्धवादी ण सढो ण दिष्णकयपसंसी ण दिष्णकयपच्छाणुतावी णातिषिहोण पडिकूलो पालसो ण तव्हालू ण छुहालू ण असंतुडो नादेसकालष्णू ण थद्धो ण बुद्धो णाकालचारीण मूढो ण णिलज्जा ण नाण|स्स कारण विप्पसवति एकाकी ण कंदपितो ण कोऊहतो ण मोहरितो ण आयारभावसुतवतेणो उज्जुभावो विसुद्ध समचो द्रढचरितो दढाभिग्गहो सुगुतो समिओ समतण्णू दढोग्गहो दढीहो दढावाओ दढघारणो वायरियपरिभासी भत्तिजुत्तो अपुरतो अपडिवो हिसओ अणुलोंमो गणसोमी संघसोभी छंदण्यू अवायष्णू सुहदुक्खण्णू अनुई अघुयत्ततो विसेसष्णू उज्जुतो अप्ररितंतो बहुसुतो ण अंतरकहापुच्छी ण समहच्छियपुच्छी व उड्डियपुच्छी सुहासविषयपृच्छी मेधात्री मनि विमुद्धबको पिपभ्रम्मो द्रढ
पंच नमस्कार, चूर्णिकारेण कृतं आद्य मंगलं
(7)
प्रस्तावना
॥ १ ॥
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