Book Title: Upasakadasanga Sutra
Author(s): Sudharmaswami, Somji Rishi
Publisher: Surat
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तमाहादार
सायकवोएन तिवारपना तेमादामतकरदस्त॥ श्रावक] जब जावादिपदानो बहरिण ततेणंसेमहासयएगादावताएसमोवासजाए अतिगयजा जोगधकई मासादानपडिलासतो विचरइंबई तिवारपना श्रमण नग, नादिरई जिणपद वाजावेजावपडिलासमाविहरतिततेणंसमण्डावबदिया जव नविषऽविकार विचरल तिवार ते रेवती ) गावापत्तनी एकदाप्रस्ताव मध्यराधि यविदारं विदरतिततेसासेरेवतीए गाढावश्याए अपयाकयाई पुवर नई ममयनविषई ऊटबजागरिका जागता) धकी! एतानरूपएडवो अध्यव सावरतकालसमयंसाऊबजागरियंजागरमागरमाइमेयारवेश सायः । उपनो) | | इम निश्चई इहो, ५। । बार बार] स्पोकना) व्याया। लिएधासम्पनिला एवंखल्भश्मीसिंज्वालसणसवतीए विधा

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