Book Title: Upasakadasanga Sutra
Author(s): Sudharmaswami, Somji Rishi
Publisher: Surat

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Page 176
________________ वित लोग सोगवतावकाविचराईते रेवती गाधापतिपणी मांसनालोलपा मोसनई उपासग न गतोगाईनमाणाविहरति ततेसारेवती गादावश्णा मंसलोलुयामसेस म विषम मातिमासन विषई घणकारश्करी मोसना सोलाको तल्लीनई || सामानई लिया जाशीवरमा बजविहदिमेसेहिया सोनेहियातलिएहितधिएगि मुरष मात्र मेरी मुजब साधु पागनोमलजातिनांमद्यसंघातितेला विचररंबई तिवारी सुचाम चामेरगंचा मऊंचासी चापसणंच आसाएमागविदरति तएवं राज्यटदिनगरन एकदा प्रस्ताव अमारानो घोषजमधलकड़ियोजेन तिवारपल तेरेवता । रायगिदिनयरे ग्राण्याकयाई त्रामाधाएघुहियाविदोकातरण सेरेवईम मांसनालोलपाऊंना मांसनईविषमुछितिजन पोतानापादनापुरुषमरतेरावाने एहबुंकहि उन्हे सलाखया मंसेमुमछियाधा कोलघरिएपुरिसेसहावईश एवंवयासी उसे बाम ताडा विशेष सूराविशेष तोगवताधका दिप वघाति कामकरस्पा। ८

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