Book Title: Laghu Prakaran Sangraha
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek,
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek
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श्रानबाजुयें पग पोहोला राखीयें, श्रने पाळला पानीना जाग तरफ चार अंगुलथी कांश्कल वर्ग ५
काला पग पोहोला राखीयें, ए रीतें जे पगर्नु थापवं, ते बीजी जिनमुखा कहीयें ॥६॥ ॥ ए६॥ बे गोठणनी वच्चे रहेला तथा मोती पाकवानी बेबीपो जेम जोडेली होय |
तेनी जेवा श्राकारवाला अने पोताना कपालने लगाडेला जेमां बे हाथ होय; ए| जिनमुज्यमीरिता ॥४६॥ मुक्ताशुक्तिसमाकारों, जानुगर्नस्थितौ समौ ॥ ल. लाटलग्नौ हस्तौ, यौ मुक्ताशुक्तिरियं मता ॥४७॥ नवा जिनवरं यायाजदन्ना वश्यकी गृहम् ॥ अश्नीयाबन्धुनिः साई, जदयानदयविचदणः ॥ ४ ॥ अ धौतपादः क्रोधान्धो, वदन्र्वचनानि यत्। दक्षिणानिमुखो जुंक्ते, तस्याजद मुक्ताशुक्ति नामक मुसा ज्ञानी पुरुषोयें मानेली ने ॥४॥ ॥ जगवंतने नमीने श्राव,
ए६॥ INसहि कहेतो थको पोताना घर प्रत्ये जाय, त्यां जश्ने ते डाह्यो श्रावक जद अनदने |
उलखतो थको पोताना बांधवो साथें जमे ॥॥ ॥पग धोया विना, रीसें अंध थको,
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