Book Title: Jain Yug 1935
Author(s): Jamnadas Amarchand Gandhi
Publisher: Jain Shwetambar Conference

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Page 32
________________ - જૈન યુગ ता. १५-२-३५ प्रचारकार्य रिपोर्ट. श्री पल्लीवाल जैन कान्फ्रेन्म. श्री जन भतांबर कॉन्फरन्सना एक उपदेशक श्री इश्वरलाल जैन जेओनं पल्लीवाल कॉन्फरन्सनी मागगीधी खास भानपुर विभागमा प्रचारार्थ रोकवामा भान्या छ तेमना तरफथी ययेल प्रचारकार्यनो रिपोर्ट आ नीचे प्रकट करवामां आवे छे: (गोक पृष्टम चाल) रणवीरगढ-सांया के निकट एक गांव है, जहांपर गज्य जयपुर की और में ५) वार्षिक सहायता मिलती है और पाशीवाल जैन श्वताम्बर मन्दिर है परंतु एक घर हैं, जिस कारण से लगभग १७ वीघा जमीन भी मन्दिर की मौजूद थी जिसमे पूजन नित्य नहीं होता। ३०-४० रु. वार्षिक आमदन हो जाती थी, परन्तु १०.१२ महुआ-सांधा से ७-१-३५ को महुआ पहुंचे. वहां वर्षसे जमीन राज्यने ले ली है। इनके पाम पं. मौजुद थे. जो पालीवालों के तीन पर है, एक जैन मन्दिर है. इन्होंने महाबीरजी में दे रब है। मनुष्यगणना की गई, व कामेन्स के दो फार्म भरवाय, जिसमें यहां की मनुष्यगणना की व कान्न्स के ? फार्म भरवाये, क्रमश: १)॥) वार्षिक चन्दा स्वीकार किया। रातको सब जिसमें वार्षिक १)।) चढा स्वीकार किया। पल्लीवाल इकड़े हुए, और भाषण दिया। तालचिड़ी-बरलासे तालञ्चिडी पहुंचा, यहां पल्लीवाली के रशीदपुर-ता. २-१-३५ को रशीदपुर पहुंचा, यहां : घर है, मन्दिरजी नहीं है, रात को उन भाइयों को इकरा पल्लीवालों के ५ घर है, एक मन्दिर है। कर भाषण दिया । व्याख्यान पुनने के लिये खरलांसभी कुर यहांवालोन मन्दिरका हिसाब सब पुजारी के भाई आ गये थे। इस लिये आनन्द अच्छा रहा, यहां की हाथमें दे दिया है जिसे या व्यासकहते है, मनुष्यगणना की व कान्केन्स के दो फान करवाये. मन्दिर की ८-१० वीघा जमीन भी है। परन्गु उसकी व्यवस्था साहरा-साहत गांव की मनुष्यगणना कर ली गई. ठीक नहीं। ता. १३-१-३५ से २५१-३५ तकमें निम्नलिखित गांवो में मन्दिरजी में मूर्ति पाषाणकी है, मनुष्यगणना जाना हुआ। की गई तथा कान्फ्रेन्स के दो फार्म भरवाये जिस में उन्होंने “पटोंदा, महावीरजी (चान्दनगांव ), शंखपुरा, रांडोली, क्रमश: १) ॥) वार्षिक चा स्वीकार किया. मसूरा और कारेडा" मब गायों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार हैबालाहेडी-यहां से कुछ दूरीपर लाहडी गांव है, ता. १३-१-३५ को मैं व मास्टर कस्तचन्दजी पदा, जहां पर एक श्वेताम्बर मन्दिर है और एक पल्लीवाल भाई गये, यहां पल्लीवालो के लगभग ८-१०: घर है, परन्तु पूजन के लिये रहता है-पूजन निन्य होता है। मन्दिरजी नहीं है, · रात को मब भाइयों को इकमा करक खेरला--८-१-३५ को बरला पहुंचा यहां पल्लीवालों के भाषण दिया गया, जिनका बहुतही अच्छा प्रभाव पड़ा, और २. घर है, एक पल्लीवाल जैन मन्दिर है जिसमें भगवान परिणाम भी अच्छा निकला। पार्थनाथजी की एक छोटी सी मूर्ति है, मन्दिरजी का न नी । यहीपर कई भाइयों के पास मिलौनी का रुपया बकाया कण्ड है और नहीं आमदन। यहां जीर्णोद्धार की अत्यन्त था. जोकि उन्हें हिण्डौन के मन्दिरजी में देना चाहिय था, आवश्यक्ता है बरसात में छत से पानी गिरता है, दिवार जीणे पस्त बह अपना इरादा किमी और कार्य में खचनेका निश्चय हो रही हैं; किवाड के आगे वर की आवश्यक्ता है पूजन कर के थे। भाषण तथा अन्य प्रकार में सममानेपर उन्होंने ठीक-होताई, वन पूजा के छोट ब थोर है, मुर्ति श्री वर रकम हिण्डौन मन्दिरी के लिये दना स्वीकार किया जा भगवान पाश्वनाथ की केवळ एक छोटी है, वर्तन यह पर'- भग ७.) रु. । उन्होंने यह भी कहा कि इन रुपयों स १ थाली १ कटोरी ३ तश्तरी। थारे बर्तन बंदी बनवाद ज्ञाय. हम ५.१० रु. और अधिक भी देंग, और और जन चाहिय। यहां भी रात को मब को समय भी देकर अपनी देखरेख में बनवायेंगे, और भविष्य में भी इक्या कर उपदेश दिया। यहां की मनुष्यगणना की और मिलौनीका क. मन्दिरजी को देना स्वीकार कीया. फार्म भरवाय जिमने वार्षिक एक एक रु. देना स्वीकार किया। यहां पर मनुष्यगगना पहिले ही हो चुकी है, फाम भी . कुजला-जना गांव जो कि हिण्डौन म १६ माइल पर इमी लिये नहि भरवाया गया. है, वहां के एक दो व्यक्ति गंबरला मिले, यहाँ पालीवामी दसर दिन मास्टर कस्तूरचन्दजी हिडीन आ गये, और तीन घर व श्वेताम्बर जैन मन्दिर है, मन्दिरनी में जीर्णोद्धार की में आग के गांवों के लिये रवाना हुआ। आवश्यक्ता. जिम के लिये उन्होंने प्रार्थनापत्र लिखकर दिया, (अनुसंधान पृष्ट उपर) આ પત્ર મી, માણેક્ષાલ ડી. મેડીએ ધી કલાપી પ્રિ. પ્રેસ, સુતાર ચાલમાંથી છાપી શ્રી જૈન શ્વેતાંબર -ફરન્સ માટે di. , मुंप४ २ भाया प्रश्न यु.

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